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क्यों महाभारत में अंधे धृतराष्ट्र को युद्ध का दोषी माना गया | Dhritarashtra

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कैसे हुआ धृतराष्ट्र का जन्म? क्यों वे बचपन से ही अंधे थे? क्या धृतराष्ट्र ने अपनी पत्नी गांधारी के परिवार का नाश किया? कैसे महाभारत युद्ध के जिम्मेदार धृतराष्ट्र ही थे? दोस्तों ऐसे ही रोचक सवालों के रोचक उतर है हमारे आज के इस अंक में? सभी सवालों के उतर जानने के लिए यह अंत तक जरूर पढ़े !

दोस्तों महाभारत ग्रन्थ अपने आप में बहुत से रहस्य समेटे हुए है! आप जितना इससे पढ़ेंगे उतना है और जानने की इच्छा आपके मन में उत्पन्न होगी ! आज हम आपको बताएँगे महाभारत के एक अनोखे और अद्भुत पात्र के बारे में, वो पात्र है महाभारत में कौरव कहलाने वाले दुर्योधन के पिता, महाराज धृतराष्ट्र !
ब्रह्मा जी के एक श्राप के कारण देवी गंगा और शांतनु को पृथ्वीलोक पे जन्म लेना पड़ा था ! कुरु राजा शांतनु और देवी गंगा को एक पुत्र हुआ जिसे देवव्रत कहा गया !  देवव्रत ने जब आजीवन ब्रह्मचर्य रहने की प्रतिज्ञा ले ली तब उन्हें भीष्म कहा जाने लगा और आगे चलकर भीष्म पितामह कहलाये ! यह तो सभी जानते हैं कि इस प्रतीज्ञा के पीछे शांतनु की दूसरी पत्नी निषाद कन्या सत्यवती का हाथ था। सत्यवती चाहती थी कि उसके ही पुत्र राजगद्दी पर बैठे। सत्यवत…

जानिए उर्मिला और लक्ष्मण के त्याग और समर्पण की कहानी ! Laxman Aur Urmila

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क्या आपको पता है क्यों लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास में एक पल भी नहीं सोये? रामायण में क्या बलिदान लक्ष्मण और उनकी पत्नी उर्मिला ने दिए? कैसा प्रेम था राम और लक्ष्मण के बीच ? क्या वरदान माता सीता ने अपनी अनुजा उर्मिला को दिया ?
तो आइये दोस्तों जानते है रामायण के ऐसे दो पात्रो के बारे में जिनके बलिदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता ! रामायण को आजतक हमने अपने और इस समाज ने एक ही दृष्टिकोण से देखा। जब हम  रामायण की बात करते है तो हमारा शीश मर्यादा पुरषोतम श्रीराम और माता सीता के आदर में झुक जाता है, और भाइयों का जहाँ जिक्र होता है तो हमे भरत याद आते है|
मगर हम आपको यह बताना चाहते है की उर्मिला और  लक्ष्मण का जीवन, बलिदान, त्याग और समर्पण की एक मिसाल है और आज की पीढ़ी के लिए उन दोनों का व्यक्तित्व सम्माननीय और पूजनीय होना चाहिए !
कहा जाता है की, जन्म के बाद, राम, भरत और शत्रुघ्न सामान्य शिशुओं की तरह थोड़ी देर रोकर की चुप हो गए, परन्तु  लक्ष्मण रोते ही रहे, पर जैसे ही उन्हें राम के बगल में लेटाया, उन्होंने रोना बंद कर दिया ! तब से ही लक्ष्मण राम की परछाई बन कर रहते है !
जब पिता के आदेश से श्री राम, मा…

भगवान राम की आचार्य रावण को अद्धभुत दक्षिणा | रावण का आचार्यत्व | Shree Ram & Ravan's Unsung story

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दोस्तों, टीम स्पिरिचुअल गॉसिप्स की और से हार्दिक अभिनन्दन, दोस्तों आज हम लाये एक ऐसे कहानी जहाँ आप जानेंगे  कैसे श्री राम ने आचार्य बने रावण की दक्षिणा पूरी की? रावण के आचार्यत्व और दक्षिणा के बारे में जानने के लिए पोस्ट को अंत तक पढ़े !
बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है, पर तमिल भाषा में लिखी महर्षि कम्बन द्वारा रचित  इरामावतारम् मे यह कथा है। रावण केवल शिवभक्त, विद्वान एवं वीर ही नहीं, अति-मानववादी भी था। उसे भविष्य का पता था। वह जानता था कि श्रीराम से जीत पाना उसके लिए असंभव है। जब श्रीराम ने खर-दूषण का वध किया तब रावण के मन में यह विचार आया जो तुलसी कृत मानस में भी लिखे हैं-
खर दूषण मो सम बलवंता। तिनहि को मरहि बिनु भगवंता।। अर्थात  खर-दूषण तो मेरे ही समान बलवान थे। उन्हें भगवान के सिवा और कौन मार सकता है ?
युद्ध पूर्व जामवंत जी को रावण के पास आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा गया। जामवन्त जी अति-विशाल देह के स्वामी थे, वे आकार में कुम्भकर्ण से थोड़े ही छोटे थे। जब जामवंतजी लंका पहुंचे तो लंका की रक्षा  में तैनात सिपाही भी उन्हें हाथ जोड़कर मार्ग दिखा…

जानिए क्यों आती है कैलाश पर्वत से ॐ की आवाज ? Kailash Parvat | Kailash Mansarovar ke rehsya

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दोस्तों, आप सभी का टीम स्पिरिचुअल गॉसिप्स की ओर से हार्दिक अभिनन्दन, दोस्तों  आज हम आप सब के सामने भगवान् शिव का निवास स्थान के रूप में विख्यात कैलाश पर्वत और उससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य तथा जानकारी लेकर आये है । दोस्तों वैसे तो पृथ्वी पर कम-से-कम 109 पर्वत हैं जिनकि ऊँचाई समुद्रतल से 7,200 मीटर (23,622 फ़ुट) से अधिक है। इनमें से अधिकांश मध्य एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत की सीमा पर स्थित हैं ।
भगवान शंकर का निवास स्थान कैलाश पर्वत है और उसके पास स्थित है मानसरोवर झील। यह अद्भुत स्थान रहस्यों से भरा है। शिवपुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में कैलाश खंड नाम से अलग ही अध्याय है, इस तीर्थ को अस्टापद, गणपर्वत और रजतगिरि भी कहते हैं। कैलाश के बर्फ से आच्छादित 6,638 मीटर (21,778 फुट) ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर के इस तीर्थ को मानस खंड भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था । स्वामी मंगलेश्वर श्री ऋषभदेव भगवान के पुत्र भरत ने दिग्विजय के समय इस पर विजय प्राप्त की थी । पांडवों के दिग्विजय प्रयास के समय अर्जुन ने भी  इस प्रदेश पर विजय प्राप्त क…

कैकेयी - दो वरदान या जग अपमान? क्यों माता कैकेयी ने खुद के लिए अपमान चुना?

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दोस्तों आप सभी का स्पिरिचुअल गॉसिप्स टीम की और से हार्दिक अभिनन्दन आज के इस ब्लॉग में हम आपके लिए रामायण के ऐसे पात्र की कहानी, जिसे पढ़कर आपकी उस पात्र के प्रति जो सोच है वह बदल जाएगी और आप उस पात्र से और भी प्रेम करने लगेंगे ! जी हाँ दोस्तों ये पात्र रामायण का काफी घृणित पात्र है पर हम आपको बताना चाहते है की अगर ये पात्र अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से न निभाते तो शायद रामायण नहीं रची जाती और भगवान राम के जीवन का अर्थ सार्थक न होता !
दोस्तों वो पात्र है माता कैकेयी, हमे पता है की आप हमारे मुख से कैकेयी के लिए माता शब्द सुन के हैरान होंगे पर हमे यकीन की हमारा पूरा ब्लॉग पढ़ने के बाद आप भी पापनि, कलंकनी जैसे शब्दों से अपमानित हुई कैकयी को माता कह के सम्बोदित करेंगे ! आइये दोस्तों, तो जानते है विस्तार से माता कैकयी के बारे में...
कैकेयी को भगवान राम को 14 वर्ष वनवास भेजने का और उनके पति राजा दशरथ की मृत्यु का दोषी माना जाता है, कैकेयी ने कैसे आपने वरदानो का उपयोग करके रामायण को एक अमर रूप दिया है !


कौन थी माता कैकेयी?माता कैकेयी, कैकेय देश के राजा अश्वपति की एकलौती बेटी थी, सात भाइयों के अकेली…

तुलसी का महत्त्व और इससे जुड़े रोचक तथ्य

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तुलसी का पौधा हमारे लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व का पौधा है जिस घर में इसका वास होता है वहां  आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सुख-शांति एवं आर्थिक समृद्धि स्वतः आ जाती है। वातावारण में स्वच्छता एवं शुद्धता, प्रदूषण का शमन, घर परिवार में आरोग्य की जड़ें मज़बूत करने, श्रद्धा तत्व को जीवित करने जैसे इसके अनेकों लाभ  हैं। तुलसी के नियमित सेवन से सौभाग्य के साथ ही सोच में पवित्रता, मन में एकाग्रता आती है और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है। आलस्य दूर होकर शरीर में दिनभर फूर्ती बनी रहती है। तुलसी की सूक्ष्म व कारण शक्ति अद्वितीय है। यह आत्मोन्नति का पथ प्रशस्त करती है तथा गुणों की दृष्टि से संजीवनी बूटी है। तुलसी को प्रत्यक्ष देव मानने और मंदिरों एवं घरों में उसे लगाने, पूजा करने के पीछे संभवतः यही कारण है कि यह सर्व दोष निवारक औषधि सर्व सुलभ तथा सर्वोपयोगी है। धार्मिक धारणा है कि तुलसी की सेवापूजा व आराधना से व्यक्ति स्वस्थ एवं सुखी रहता है। अनेक भारतीय हर रोग में तुलसीदल-ग्रहण करते हुए इसे दैवीय गुणों से युक्त सौ रोगों की एक दवा मानते हैं। गले में तुलसी-काष्ठ की माला पहनते हैं।

सनातन धर…

अचंभित जीवन लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला का

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स्त्री से समाज ने हमेशा परीक्षा की ही उम्मीद रखी है फिर चाहे माता सीता हो या द्रौपदी या तुलसीवृन्द। आज हम आप सब के सामने ऐसी ही एक स्त्री का जीवन चरित्र लेकर आये है जिनका नाम था उर्मिला।
रामायण के अनुसार राजा दशरथ के तीसरे पुत्र थे लक्ष्मण। उनकी माता का नाम सुमित्रा था। वास्तव में लक्ष्मण का वनवास राम के वनवास से भी अधिक महान है। 14 वर्ष पत्नी से दूर रहकर उन्होंने केवल राम की सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बनाया। लक्ष्मण के लिए राम ही माता-पिता, गुरु, भाई सब कुछ थे और उनकी आज्ञा का पालन ही इनका मुख्य धर्म था।
उर्मिला का अखंड पतिव्रत धर्म : वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उर्मिला जनकनंदिनी  सीता की छोटी बहन थीं और सीता के विवाह के समय ही दशरथ और सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण को ब्याही गई थीं। जब राम और सीता के साथ लक्ष्मण भी वनवास को जाने लगे तब पत्नी उर्मिला ने भी उनके साथ जाने की जिद की, परन्तु लक्ष्मण ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि अयोध्या के राज्य को और माताओं को उनकी आवश्यकता है।
उर्मिला के लिए यह बहुत कठिन समय था ऐसे में जबकि वह नववधू थीं और उसके दांपत्य जीवन की तो अभी शुरुआत ही हुई थी। लक्…