Posts

Featured Post

भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी कुछ खास बातें।

Image
हिन्दू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का एक रूप माना गया है। धर्मग्रंथों (पुराणों) के अनुसार भगवान दत्तात्रेय विष्णु के छठे अवतार कहे जाते हैं। वह सर्वव्यापी कहलाये क्योंकि वह आजन्म ब्रह्मचारी  और एक सन्यासी रहे थे। इसी कारण से तीनों ईश्वरीय शक्ति के रूप भगवान दत्तात्रेय की आराधना बहुत सफल, सुखदायी और तुरंत फलदायी मानी जाती है। मन, कर्म और वाणी से की गयी इनकी उपासना भक्त को हर तरह की कठिनाइयों से मुक्ति दिलाती है।
ऐसा कहा जाता है कि भगवान भोले (शिव) का साक्षात् रूप दत्तात्रेय में मिलता है। जब वैदिक कर्मों का, धर्म का और वर्ण व्यवस्था का लोप हो गया था, तब भगवान दत्तात्रेय ने सबका पुनरुद्धार किया था। कृतवीर्य के बड़े पुत्र अर्जुन ने अपनी सेवाओं से इन्हें प्रसन्न कर चार वर प्राप्त किये थे।
पहला: बलवान, सत्यवादी, मनस्वी, आदोषदर्शी तथा सहभुजाओं वाला बनने का। दूसरा: जरायुज और अंडज जीवों के साथ-साथ समस्त चराचर जगत का शासन करने के सामर्थ्य का। तीसरा: देवता, ऋषियों, ब्राह्मणों आदि का यजन करने तथा शत्रुओं का संहार कर पाने का। चौथा: इहलोक (पृथ्वीलोक), स्वर्गलोक…

कैलाश पर्वत और उससे जुड़े रोचक तथ्य |

Image
भगवान शिव को दुनिया के सभी धर्मों का मूल माना जाता है और हिन्दू धर्म में भगवान शिव को मृत्युलोक का देवता माना गया है। भगवान शिव अजन्मे माने जानते हैं, ऐसा कहा जाता है कि उनका न तो कोई आरम्भ हुआ है और न ही अंत होगा। इसीलिए वे अवतार न होकर साक्षात ईश्वर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कैलाश पर्वत को भगवान शंकर का निवासस्थान माना जाता है. लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते हैं. इसके अलावा कैलाश पर्वत की चोटियों के बीच स्थित झील को “मानसरोवर झील” के नाम से जाना जाता है. कैलाश पर्वत को दुनिया के सबसे रहस्यमयी पर्वतों में से एक माना जाता है. इस लेख में हम कैलाश पर्वत से जुड़े 9 रोचक तथ्यों का विवरण दे रहे है।

चार महान नदियों का उद्गम स्थल कैलाश पर्वत चार महान नदियों सिंध, ब्रह्मपुत्र, सतलज और कर्णाली (घाघरा) का उद्गम स्थल है। इसके अलावा इसकी चोटियों के बीच दो झील स्थित है। कैलाश मानसरोवर झील जो की दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित शुद्ध पानी की सबसे बड़ी झीलों में से एक है और इसका आकार सूर्य के सामान है।

मानसरोवर झील में नहाने से मिलती है पापों से मुक्ति यदि आप कैला…

अद्भुत सोमनाथ मंदिर और उसके रोचक तथ्य |

Image
सोमनाथ मंदिर गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र में वेरावल बंदरगाह के पास प्रभास पाटन में स्थित है। यह मंदिर भारत में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला माना जाता है। यह गुजरात का एक महत्वपूर्ण तीर्थ और पर्यटन स्थल है। प्राचीन समय में इस मंदिर को कई मुस्लिम आक्रमणकारियों और पुर्तगालियों द्वारा बार-बार ध्वस्त करने के बाद वर्तमान हिंदू मंदिर का पुनर्निर्माण वास्तुकला की चालुक्य शैली में किया गया। सोमनाथ का अर्थ है, “भगवानों के भगवान”, जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। गुजरात का सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर ऐसी जगह पर स्थित है जहां अंटार्टिका तक सोमनाथ समुद्र के बीच एक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। सोमनाथ मंदिर के प्राचीन इतिहास और इसकी वास्तुकला और प्रसिद्धि के कारण इसे देखने के लिए देश और दुनिया से भारी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास
माना जाता है कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव सोमराज ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है। इतिहासकारों का मानना है कि गुजरात के वेरावल बंदरगाह में स्थित सोमनाथ मंदिर की महिमा …

भारत के रहस्यमय मन्दिर - 1: श्री जगन्नाथ मन्दिर, पुरी, ओडिशा

Image
जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि हमारा देश विविधताओं का देश है, इन्ही विविधताओं में कई ऐसे रहस्य है जो पहेली बनकर हम सभी के सामने खड़े है। जिन्हें आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। कुछ रहस्यात्मक चमत्कार जो आज हमें ज्ञात हैं, वे सनातन धर्म के कुछ मन्दिरों से जुड़े हैं। आज तक भी कई ऐसे अन-सुलझे रहस्य है जिनका विज्ञान के पास कोई जवाब नहीं है। जिन्हे देखकर लगता है कि इनके पीछे अवश्य ही कोई अलौकिक शक्ति विध्यमान है।
यह लेख हमारे देश के ऐसे अन-गिनत मन्दिरों के रहस्यों से आपको अवगत करवाने की एक शुरुआत है, इस श्रंखला में आप हिंदुस्तान के अद्भुत मन्दिरों के इतिहास, वर्तमान तथा उनसे जुड़ी रहस्यमय घटनाओं के बारे में जानेंगे।
इतिहास- श्री जगन्नाथ मन्दिर, पुरी, ओडिशा- इस मन्दिर का निर्माण 12वीं शताब्दी ईसा पूर्व में गंगावंश के राजा अनन्तवर्मन चोड़गंगा द्वारा करवाया गया था। इसका प्रमाण इनके वंशज नरसिम्हा देव द्वितीय के केंदुपटना के ताम्र-शिलालेख से मिलता है। अनन्तवर्मन मूलरूप से शैव थे, और 1112 ईस्वी में उत्कल क्षेत्र (जिसमें मंदिर स्थित है) पर विजय प्राप्त करने के कुछ समय बाद वे वैष्णव बन गए। 1134-1135 ईसा…

अष्टावक्र गीता के पीछे का सच - गीता के 60 प्रकार में से एक।

Image
ये तो हम सभी को ज्ञात है कि मिथिला के सभी राजाओं को जनक कहा जाता था। उनमें से एक राजा जनक, जिनको आत्मज्ञान होने से पहले वे एक पंडित के द्वारा शास्त्रों का ज्ञान ले रहे थे, पंडित ने एक पद पढ़ा -
"घोड़े की एक रकाब में पैर डालने के बाद में दूसरा पैर डालने में जो समय लगता है केवल मात्र उतने समय में ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। "
यह सुनते ही राजा जनक ने पुछा कि क्या यह बात सत्य है। पंडित ने कहा कि ये पूर्णतया सत्य है और इसमें कोई संदेह नहीं किया जा सकता। राजा ने तुरंत अपना घोडा मंगवाया ताकि शास्त्रों की सत्यता को रखा जा सके और यदि ऐसा नहीं हुआ तो पंडित को इसका उत्तरदायी ठहराया जाये। पंडित ने कहा कि वह सिद्ध तो नहीं कर सकता परन्तु शास्त्रों में लिखी कोई भी बात गलत नहीं होती इस बात पर वह पूर्ण रूप से विश्वास करता है और राजा को भी करना चाहिए।
इस पर राजा ने उसे बंदी बनाकर कैद करवा दिया और उसके बाद राज्य से बहुत से पंडितों को बुलवाया और कहा कि या तो इसे सिद्ध करो या फिर शास्त्रों में से इस बात को हटाकर शास्त्रों को सही करो क्योंकि शास्त्रों में कोई गलत बात नहीं होनी चाहिए। इस प…

गीता विभिन्न सन्दर्भों में भाग -2

Image
भाग 1  में 30  गीताओ की जानकरी हमने आपको उपलब्ध कराई थी अब आगे की गीता के बारे में जानने के लिए आगे पढ़े 
31. ईश्वर गीता - इस गीता में भगवान शिव द्वारा दी गई शिक्षा का उल्लेख है, इसका वर्णन कर्म पुराण में मिलता है। ईश्वर गीता भगवान शिव के साथ केंद्र बिंदु के रूप में शैव शिक्षण दर्शन है, लेकिन अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों, भक्ति, एक सूत्र के बाद भगवद गीता के समान है और भगवान शिव को संसार के सागर को पार करने और दिव्य आनंद और मुक्ति प्राप्त करने के लिए स्वयं को समर्पित करने का सन्देश देती है।

32. गणेश गीता - इसमें भगवान गणेश द्वारा राजा वरेण्य को दिए गए प्रवचनों का उल्लेख मिलता है। इसका वर्णन गणेश पुराण के क्रीड़ाकाण्ड में मिलता है।

33. देवी गीता - यह देवी भागवतम का भाग है, हिमालय के अनुरोध पर देवी अपने मूलभूत रूपों का वर्णन करती हैं।

34. पराशर गीता - यह महाभारत के शांति पर्व में वर्णित राजा जनक और ऋषि पराशर के मध्य वार्तालाप का संकलन है।

35. पिंगला गीता - यह गीता पिंगला नाम की एक नाचने वाली लड़की को मिले ज्ञान और प्रबुद्धता का सन्देश देती है। इसका वर्णन महाभारत के शांति पर्व में मिलता है।

36. बो…

गीता विभिन्न सन्दर्भों में भाग -1

Image
साधारणतयाहम "भगवदगीता" कोही "गीता" मानतेहैंजिसमेंभगवानश्रीकृष्णनेअर्जुनकोजीवनकेविभिन्नपहलुओंकेबारेमेंसमझायाहै।परन्तुआपकोयहजानकरआश्चर्य