Posts

Showing posts from August, 2018

कुसङ्ग से हानि एवं सुसङ्ग से लाभ

Image
प्रियादासजी नाभाजी के हार्दिक भाव को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि- अहो ! यदि मुझे बार-बार  जन्म लेकर संसार में आना पड़े तो इसकी मुझे कुछ भी चिंता नहीं हैं क्योंकि इसमें बड़ा भारी यह लाभ होगा कि सन्तों के चरण कमलों कि रज सिर पर धारण करने का सुबह अवसर मिलेगा । प्राचीनबर्हि आदि भक्तों की कथाएँ पुराण-इतिहासों में वर्णित हैं । परन्तु महर्षि वाल्मीकि की कथा को कभी चित्त से दूर नहीं करना चाहिये । महर्षि वाल्मीकि पहले भीलों का साथ पाकर भीलों का सा आचरण करने वाले हो गये फिर सन्तों का संग पाकर ऋषि हो गये । उन्हें श्रीरघुनाथजी के दर्शन हुए । उन्होंने अपनी वाल्मीकि रामायण में श्रीरामजी के चरित्रों का विस्तार पूर्वक ऐसा उत्तम वर्णन किया है, जिन्हे गाते और सुनते हुए संसार तृप्त नहीं होता है । श्रोताओं और वक्ताओं  के हृदय उत्त्कट प्रेमानुरागमय भावों से भर जाते हैं फिर आनन्दवश नेत्रों से आँसुओ की धारा बहती रहती है ।
बँगला-भाषा के कृत्तिवास रामायण के अनुसार ये अंगिरागोत्र में उत्पन्न एक ब्राह्मण थे । नाम था रत्नाकर । बालपने से ही किरातों के कुसंग में पड़कर ये किरात ही हो गये थे । ब्राह्मणत्व नष्ट हो गया …

" हरी नाम की महिमा " भाग 2

Image
अब आगे--
फिर हनुमानजी ने रामजी से आज्ञा ली और सरयू के तट की और प्रस्थान किया । हनुमानजी को अपनी और आता देख राजा की जान में जान आयी । राजा ने हनुमानजी से कहा की प्रभु आपने रामजी को मना लिया । आपकी कृपा से मुझे जीवनदान मिला है मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूँ । हनुमानजी बोले राजन तुमने मुझे बहुत बड़े संकट में डाल दिया हैं । अभी-अभी राम जी घोड़े पर सवार होकर इसी और आ रहे है, और साथ में रामबाण भी ला रहे हैं । वो तुम्हे मृत्युदंड देंगे पर तुम चिंता मत करो, मैं भी रामबाण साथ लाया हूँ । प्रभु से मैं भी रामबाण से ही युद्ध करूंगा । 

तब राजा बोला की प्रभु तो मैं बैठ जाऊ । हनुमानजी बोले नहीं रे पगले मैं उनके सामने इस शरीर को लेकर कैसे आ सकता हूँ । ये लो खरताल मैं तुम्हारी पीठ के पीछे छोटा सा रूप धारण करके छूप जाऊँगा । जब प्रभु श्रीराम आये तो तुम यह बाण चलाना । फिर हनुमानजी ने राजा के कान में मंत्र फूक दिया । जब भगवान आये तो, राजा नाच नाच कर गाने लगा

रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम ।
सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय, सीताराम ॥

महावीर के मंत्र को राजा ने नाच नाच कर गाना शुरू कर दिया । प्रभु श्रीराम य…

" हरी नाम की महिमा " भाग 1

Image
एक बार प्रभु श्रीराम जी ने दरबार लगाया था । आस पास के कई राजाओ और महाराजाओ को दरबार में आने का निमंत्रण भेजा गया । प्रभु ने सभी राजाओ और महाराजाओ को समझाया की कैसे राज्य चलाना चाहिए और कैसे प्रजा का पालन करना चाहिए । उस सभा में प्रभु श्रीराम ने कहा की प्रजा पुत्र सामान होती हैं । एक राजा को अपनी प्रजा को पुत्र समान समझना चाहिए । सभा में प्रभु श्रीराम ने कहा की जिस राजा को प्रजा प्यारी नहीं लगती वो राजा नर्क का उत्तराधिकारी होता हैं । इसी सभा के एक द्वार था जिस से सभी राजा और महाराजा अंदर जा रहे थे । उस द्वार पर नारदजी आकर बैठ गए, नारदजी ने एक राजा को सम्मान के साथ रोका और कहा की अंदर जाकर प्रभु श्री राम को शीश निवाना ( नमन करना ) तथा सभी ऋषियों और मुनियों को शीश निवाना और सम्मान देना परन्तु विश्वामित्र को ना तो शीश निवाना और ना ही सम्मान देना ।

नारद जी के ऐसा कहने पर राजन ने विश्वामित्र का सम्मान न करने का कारण पूछा तो नारद जी ने राजन से कहा की विश्वामित्र क्षत्रिय हैं और तुम भी क्षत्रिय हो तो क्षत्रिय का क्षत्रिय को नमन करना नहीं बनता हैं ।

ये तो आप सभी जानते हैं की एक बार जो नारद ज…

क्यों करते है संपन्न परिवार शिव आराधना ।

Image
अापने हमारे पिछले अंक में शिव आराधना के बारे में पढ़ा होगा, आज हम आपके सामने एक  और रौचक जानकारी ले कर आये है की क्यो संपन्न परिवार शिव आराधना करते हैं । हम आपको पहले ही बता दे इस कहानी के द्वारा हम किसी भी व्यक्ति, समुदाय, भक्तो, जाति विशेष, आमजन की भावना को ठेस नहीं पहुंचना चाहते, यह कहानी संतो की वाणी से प्रेरित है ।
आपने अक्सर देखा होगा की हिन्दुओ में संपन्न परिवार शिव की पूजा आराधना करते है, आइये जानते है की इसके पीछे क्या कहानी छुपी है । हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिन्दुओ के 33 कोटि देवी देवता है, यहाँ कई लोग समझने में भूल करते है और मानते है की 33 करोड़ देवी देवता होते है । 33 कोटि देवी देवताओ का मतलब है 33 प्रकार के देवी देवता, जिनमे से कई देवी देवताओ को प्रमुख दर्जा दिया गया है जैसे, भगवान् श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमानजी,  श्रीविष्णु, ब्रह्माजी, शिवजी इत्यादि ।
अगर हम देखे तो हिन्दू साहित्य और ग्रन्थ इन सभी शक्तियों के जीवन के बारे में हमे बहुत कुछ बताते है और सिखाते हैं । इनका जीवन एक आदर्श हैं पूरी मानव-जाति के लिये । तो आइये जानते है ऐसी कौनसी बात है जो आशुतोष भगवान् शिव शंकर…

जो जैसा बोता है, वो वैसा काटता है... ( भाग २ )

Image
वही दूसरी और कृष्ण और गोपियों के बीच बहुत प्यार था, गोपियाँ सोचती कृष्ण आयेंगे तो उनके लिए कुछ उपहार लायेंगे ! कृष्ण कुछ नहीं लाये और उल्टा उनका ही माखन और दही उनसे ले लिया ! कर्ण जब घायल थे, तब कृष्ण आपने मित्र अर्जुन को ले के उनके मैदान में चले गए और कहा- हे कर्ण ! हमने सुना है की कोई भी तुम्हारे दरवाजे से कभी खाली हाथ  नही जाता, हम तुमसे मांगने आये थे, पर लगता है तुम कुछ देने की हालत में नहीं हो ! कर्ण ने कहा- वासुदेव रुकिए, खाली हाथ मत जाइये, मेरे दांत सोने के है और वही रखा एक पत्थर  उठा लिया और आपने दो दांत तोड़ कर, एक अर्जुन को दे दिया और एक कृष्ण के हाथ में रख दिया ! सुदामा भी आपने मित्र कृष्ण के पास कुछ मांगने गए थे, ताकि उनका गुजरा हो सके, पर कृष्णा ने उनसे उनके बगल में दबी चावल की पोटली मांग ली और उस चावल को खुद ने भी खाया और आपनी रानियों को भी खिलाया ! जो कुछ भी सुदामा के पास था सब खाली कर दिया !
बाद में सुदामा को भी बहुत कुछ दिया, कर्ण को भी दिया,गोपीयों को भी दिया, बलि को भी दिया, हनुमान, सुग्रीव, केवट सभी को कुछ न कुछ दिया, पर सबसे पहले उन्होंने सबसे लिया ही था !
भगवान ज…

जो जैसा बोता है, वो वैसा काटता है... ( भाग १ )

Image
आज हम आपको बताएँगे के इस सृष्टि के एक अद्भुत नियम के बारे में... आपने हमेशा सुना होगा जो जैसा बोता है, वो वैसा काटता है ! 
एक युगऋषि के नयी बात बताई है, कहा है की... 
तुम्हारे पास जो भी कुछ है, उस बोना शुरू कर दो... कहा और क्यों बोना है, तो उन्होंने बताया तुम्हारे पास जो भी है उससे भगवान् के खेत में बोना शुरू कर दो, वह तुम्हे सौ गुना होकर तुम्हे वापिस मिल जायेगा ! उन्होंने कहा की ऋद्धि और सिद्धि पाने का यही तरीका है, यह दोनों चीजे किसी को भी यूँही नहीं मिल जाती ! दुनिया में कोई ऐसा नहीं है  जो ऋद्धियाँ और सिद्धियां बाँट रहा है या कही से कुछ ऐसे ही मिल रहा हो, इस तरह का कोई नियम इस संसार में नहीं है !
किसान कुछ बोता है, तभी कुछ काटता है, ठीक उसी तरह हमें भी कुछ पाने के लिए कुछ बोना पड़ेगा! अब हमे ऐसा क्या बोना पड़ेगा, तो युगऋषि कहते है... मनुष्य के तीन शरीर है - स्थूल, सूक्ष्म और कारण ! इसमे से स्थूल शरीर से श्रम होता है, सूक्ष्म शरीर में  बुद्धि होती है और कारण शरीर में भावनाएँ | "तुम्हारे पास शरीर है", शरीर यानि श्रम और समय, इन्हे भगवान के खेत में बोओ ! अब बात आती है की कहा …

क्या है रामायण में घास के तिनके का रहस्य

Image
घास का तिनका 

रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो हर किसी को मालूम नहीं है क्योंकि आम व्यक्तिओ में से किसी ने भी हमारे ग्रंथो को समझने की कोशिश नहीं की, सिर्फ पढ़ा है और सूना है!
आज आपके समक्ष ऐसा ही एक रहस्य बताने जा रहे है,

रावण जब माता सीता का हरण करके लंका ले गया था, तब सीता माता वट वृक्ष के नीचे  बैठकर चिंतन करने लगी, रावण बार बार आकर माता सीता को धमकाता था, लकिन सीता माता कुछ नहीं बोलती थी, यहा तक की रावण ने श्री राम का रूप धारण करके माता सीता को भ्रमित करने की कोशिश भी की परन्तु फिर भी रावण सफल नहीं हो पाया, जब रावण थक हार कर अपने शयन कक्ष में गया तो रानी मंदोदरी ने कहा की आप तो श्री राम का वेश धारण कर के गए थे, फिर भी असफल कैसे हो गए, रावण ने मंदोदरी से कहा की जब मैं राम का वेश धारण कर के सीता के समक्ष गया तो सीता मुझे नज़र ही नहीं आ रही थी ! रावण अपनी समस्त ताकत और चालाकी लगा चूका था, लेकिन जगत जननी माता सीता को कोई आज तक समझ ही नहीं सका तो भला रावण कसे समझ पाता ! 

रावण एक बार फिर वहाँ गया जहा माता सीता वट वृक्ष के नीचे  बैठी थी और बोला मैं तुमसे सीधे सीधे संवाद कर रहा हू…

शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाते हैं |

Image
हिन्दू धर्म में कई सारे देवी देवता पूजे जाते है, पर त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्थान सबसे ऊपर है ! जहां ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचियता माना जाता है, विष्णु जी को सृष्टि का रक्षक और महेश यानी महादेव शिव जी का कार्य संसार से बुराई का अंत करना है !

आप जब ही मंदिर में जाते है तो देखते होंगे की कुछ ऐसा इंतजाम किया जाता है की शिवलिंग पे जल की बुँदे लगातार गिरती रहे और शिवलिंग जल से सदा तर रहे, क्या आप जानते है की शिवलिंग को जल से नहलाने का क्या कारण है! आज हम आपको इसके भौतिक, आध्यात्मिक, एवं वैज्ञानिक कारण बताएँगे!

सबसे पहले हम आपको भौतिक कारण के बारे में बताते है क्या है भौतिक कारण 

"भौतिक कारण" 

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का एक भौतिक कारण तो ये बताया जाता है की इससे वहां मौजूद नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है ! जैसा की आप सभी जानते है आशुतोष भगवान्  शिव शंकर ने विषपान किया था ! जिससे उनका मस्तिष्क गर्म हो गया था ! जिस कारण से देवताओ ने उनके मस्तक पर जल डालकर उसे शीतल किया ! यहाँ मस्तिष्क गर्म होने से अभिप्राय नकारात्मक भावो के आपके भीतर उत्पन होने से और जल चढ़ा कर शीतल करने से अर्थ…

क्यों करते है हम धार्मिक स्थल की सीढ़ियों को प्रणाम ?

Image
आप सभी लोग मंदिर, गुरुद्वारा आदि तो जाते ही होंगे, और आपने वाहा आते जाते लोगो को उस धार्मिक स्थल की चौखट या सीढ़ी छूते या प्रणाम करते देखा होगा, पर क्या आपलोगो ने कभी सोचा है वह आने वाले लोग ऐसा क्यों करते है !
हम आपने मन में असीम श्रद्धा लिए मंदिर, गुरुद्वारा आदि जाते है और ये ध्यान रखते है, की हम वही सब करे जो हमारे भगवान् कोपसंद है ! अब बात आती है की भगवान् कोऐसा क्या पसंद है जो हमे देहलीज को प्रणाम करने को कहता है!
भगवान् को सबसे ज्यादा प्रिय होते है, उनके आपने भक्त जो वहा रोज उनसे मिलने आते है, और वो आपने भक्तों का पूरा ख्याल रखते है!भगवान भी चाहते है की जो प्रेम और श्रद्धा का भाव लिए उनके भक्त उनके पास आये है, वही प्रेम और श्रद्धा का भाव उन भक्तों को कई गुना ज्यादा हो के उन्हें वापस मिले!
इसलिए भगवान् ने आपने भक्तों से कहा की मुझे खुद से भी ज्यादा मेरे भक्त प्रिये है, जो उनका आदर और सम्मान करेगा, वो मेरा भी आदर सम्मान करेगा! भगवान् कहते है मुझे आदर और सम्मान देने से पहले, मेरे भक्तों का आदर और सम्मान करो, मुझे प्रणाम करने से पहले मेरे भक्तों को प्रणाम करो !
अब भगवान् के तो इतने भक्त …