क्यों करते है हम धार्मिक स्थल की सीढ़ियों को प्रणाम ?




आप सभी लोग मंदिरगुरुद्वारा आदि तो जाते ही होंगे, और आपने वाहा आते जाते लोगो को उस धार्मिक स्थल की चौखट या सीढ़ी छूते या प्रणाम करते देखा होगा, पर क्या आप  लोगो ने कभी सोचा है वह आने वाले लोग ऐसा क्यों करते है !

हम आपने मन में असीम श्रद्धा लिए मंदिर, गुरुद्वारा आदि जाते है और ये ध्यान रखते है, की हम वही सब करे जो हमारे भगवान् को  पसंद है ! अब बात आती है की भगवान् को  ऐसा क्या पसंद है जो हमे देहलीज को प्रणाम करने को कहता है!

भगवान् को सबसे ज्यादा प्रिय होते है, उनके आपने भक्त जो वहा रोज उनसे मिलने आते है, और वो आपने भक्तों का पूरा ख्याल रखते है!  भगवान भी चाहते है की जो प्रेम और श्रद्धा का भाव लिए उनके भक्त उनके पास आये है, वही प्रेम और श्रद्धा का भाव उन भक्तों को कई गुना ज्यादा हो के उन्हें वापस मिले!

इसलिए भगवान् ने आपने भक्तों से कहा की मुझे खुद से भी ज्यादा मेरे भक्त प्रिये है, जो उनका आदर और सम्मान करेगा, वो मेरा भी आदर सम्मान करेगा! भगवान् कहते है मुझे आदर और सम्मान देने से पहले, मेरे भक्तों का आदर और सम्मान करो, मुझे प्रणाम करने से पहले मेरे भक्तों को प्रणाम करो !

अब भगवान् के तो इतने भक्त है, तो सबके पास जा के उन्हें आदर और सम्मान देना, सबको एक एक करके प्रणाम करना तो संभव नहीं है! तो यह मनीयता है की मंदिर की  सीढ़ी  या देहलीज ऐसी जगह है जहा से हर भक्त हो के गुजरता है, इसिलए हर भक्त को प्रणाम करने के लिए हम धार्मिक स्थल की सीढ़ी या देहलीज को प्रणाम करते है.

आप भी अगली भर जब भी भगवान् के द्वार जाओ तो भगवान् से पहले उनके भक्तों को प्रणाम करना न भूले !

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