जो जैसा बोता है, वो वैसा काटता है... ( भाग १ )



आज हम आपको बताएँगे के इस सृष्टि के एक अद्भुत नियम के बारे में... आपने हमेशा सुना होगा जो जैसा बोता है, वो वैसा काटता है ! 

एक युगऋषि के नयी बात बताई है, कहा है की... 

तुम्हारे पास जो भी कुछ है, उस बोना शुरू कर दो... कहा और क्यों बोना है, तो उन्होंने बताया तुम्हारे पास जो भी है उससे भगवान् के खेत में बोना शुरू कर दो, वह तुम्हे सौ गुना होकर तुम्हे वापिस मिल जायेगा ! उन्होंने कहा की ऋद्धि और सिद्धि पाने का यही तरीका है, यह दोनों चीजे किसी को भी यूँही नहीं मिल जाती ! दुनिया में कोई ऐसा नहीं है  जो ऋद्धियाँ और सिद्धियां बाँट रहा है या कही से कुछ ऐसे ही मिल रहा हो, इस तरह का कोई नियम इस संसार में नहीं है !

किसान कुछ बोता है, तभी कुछ काटता है, ठीक उसी तरह हमें भी कुछ पाने के लिए कुछ बोना पड़ेगा!
अब हमे ऐसा क्या बोना पड़ेगा, तो युगऋषि कहते है...
मनुष्य के तीन शरीर है - स्थूल, सूक्ष्म और कारण ! इसमे से स्थूल शरीर से श्रम होता है, सूक्ष्म शरीर में  बुद्धि होती है और कारण शरीर में भावनाएँ | "तुम्हारे पास शरीर है", शरीर यानि श्रम और समय, इन्हे भगवान के खेत में बोओ ! अब बात आती है की कहा है भगवान और भगवान का खेत ? तो युगऋषि कहते है

यह विराट भगवान जो चारों ओर समाज के रूप में विद्यमान है, इसके के लिए तुम अपने श्रम, समय  और शरीर को खर्च कर डालो , वह तुम्हे वापिस सौ गुना होकर मिल जायेगा !

दूसरा तुम्हारे पास बुद्धि है, भगवान की दी हुई सबसे श्रेष्ठ चीजों में से एक है ! इस बुद्धि को इधर उधर व्यर्थ करने की बजाय, इस बुद्धि के सामर्थय को भगवान् के खेत में बोओ, तुम्हे तुम्हारी बुद्धि सौ गुना होके मिल जाएगी !

तीसरी अहम चीज है, भावनाएँ ! अपनी भावनाएँ को घरेलु चीजों पे खर्च करने की बजाय, भगवान् के खेत में लगा दो, तुम्हे ये भावनाएँ सौ गुना होके मिलेंगी !

ये तीन चीजे तुम्हे भगवान् ने दी है किसी इंसान ने नहीं दी ! एक और चीज है वो शायद तुमने कमाई या किसी इंसान से तुम्हे प्राप्त हुई हो वो है "धन", जो भगवान् ने तुम्हे नहीं दिया है ! युगऋषि कहते है की कुछ धन भगवान् के खेत में बो दो, जितना तुम बौआ के उसका सौ गुना तुम्हे वापिस मिलेगा ! आप भी ऐसे ही अगर बोए तो युग ऋषि की तरह ऋद्धिया और सिद्धियां प्राप्त कर सकते है !

हम सब भगवान् से मांगते रहते है, और उम्मीद करते है की जो हमने माँगा वो भगवान् हमे दे देंगे, और जब हम देखते है की भगवान् सब को उनकी मन चाही चीजे बाँट रहे तो हमे भी हमारी मनचाही चीज बाँट देंगे ! 

भगवान् को हम समझते है की वे सिर्फ बाँटते फ़िरते है, बाँटते तो है पर उससे से पहले वे मांगते फिरते है ! भगवान् की इच्छा मांगने की है ! भगवान् शबरी के यहाँ गए थे और कहा हम भूखे लहै कुछ खाने को है तो ले आओ,  शबरी के पास बेर थे, सो उससे ले लिए ! केवट के पास गए  और कहा हमे नदी पार करा दो, केवट ने नदी पार करा दी ! सुग्रीव के पास गए, कहा हमारी सीता को कोई चुरा के ले गया है, तुम अपनी सेना दे दो तो मेहेरबानी होगी ! हनुमान से माँगा की हमारा भाई बीमार है दवा ला दो, लंका में सीता तक यह सन्देश पहुँचा  दो और सीता की कुछ खबर ला दो ! बलि से साढ़े तीन कदम के नाम पे सब कुछ ले लिया !

शेष आगे के भाग में...

                                    वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्री राम शर्मा आचार्य की किताबो से प्रेरित 

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