क्यों करते है संपन्न परिवार शिव आराधना ।



अापने हमारे पिछले अंक में शिव आराधना के बारे में पढ़ा होगा, आज हम आपके सामने एक  और रौचक जानकारी ले कर आये है की क्यो संपन्न परिवार शिव आराधना करते हैं । हम आपको पहले ही बता दे इस कहानी के द्वारा हम किसी भी व्यक्ति, समुदाय, भक्तो, जाति विशेष, आमजन की भावना को ठेस नहीं पहुंचना चाहते, यह कहानी संतो की वाणी से प्रेरित है ।

आपने अक्सर देखा होगा की हिन्दुओ में संपन्न परिवार शिव की पूजा आराधना करते है, आइये जानते है की इसके पीछे क्या कहानी छुपी है । हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिन्दुओ के 33 कोटि देवी देवता है, यहाँ कई लोग समझने में भूल करते है और मानते है की 33 करोड़ देवी देवता होते है । 33 कोटि देवी देवताओ का मतलब है 33 प्रकार के देवी देवता, जिनमे से कई देवी देवताओ को प्रमुख दर्जा दिया गया है जैसे, भगवान् श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमानजी, 
श्रीविष्णु, ब्रह्माजी, शिवजी इत्यादि ।

अगर हम देखे तो हिन्दू साहित्य और ग्रन्थ इन सभी शक्तियों के जीवन के बारे में हमे बहुत कुछ बताते है और सिखाते हैं । इनका जीवन एक आदर्श हैं पूरी मानव-जाति के लिये । तो आइये जानते है ऐसी कौनसी बात है जो आशुतोष भगवान् शिव शंकर को इन सभी से अलग करती है ।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम का भरापूरा परिवार था, पर उन्होंने कुल की मर्यादा को निभाने के लिए अपनी पत्नी ( माता सीता ) समेत 14 वर्ष का वनवास काटा और वनवास में ना केवल दुःख भोगे अपितु अपनी पत्नी का वियोग भी सहा तथा वनवास के पश्चात एक धोबी के अपनी पत्नी ( धोबिन ) के साथ हुए व्यन्तव्य को आधार मान कर, उस व्यन्तव्य के द्वारा अपनी प्रजा पर होने वाले दुर्त्गामि परिणाम की परिकल्पना करके भगवान् श्रीराम ने अपनी पत्नी ( माता सीता ) को अपने आप से दूर वाल्मीकि आश्रम में भेजा । वो भी उस समय जब माता सीता गर्भवती थी ।

भगवान् कृष्ण के बारे में हम सब जानते है की वे बड़े ही नटखट थे, हिन्दू कथाओ के अनुसार कृष्ण के 16108 पत्निया थी जिसमे  से 3 रानियाँ और 5 पटरानियाँ और एक राधा जी, जिन्हे लोग उनकी प्रेमिका कहते हैं ।

हिन्दू कथाओ में विष्णु जी और माता लक्ष्मी का उल्लेख पति पत्नी के रूप में किया जाता है, और कहा गया है की माता लक्ष्मी भगवान् विष्णु के चरणो में बैठती हैं ।

ग्रंथो और पुराणों के अनुसार ब्रह्माजी की पत्नी हैं, माता सरस्वती और ग्रंथो में ऐसा उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी और सरस्वतीजी, सदा एक दूसरे से दूर बैठा करते हैं ।

हिन्दू कथाओ में भगवान् शिव को भोलेनाथ कहकर सम्बोधित किया जाता हैं, और आशुतोष भगवान् शिव शंकर की पत्नी माता पार्वती हैं एवं उनके दो पुत्र हैं, गणेशजी और कार्तिकेयजी  । कहा जाता है की भगवान् शिव जब भी ध्यान मुद्रा से बाहर आते हैं तो वह अपने पूरे परिवार के साथ हिमालय में निवास करते हैं ।

तथा हम आप सभी को एक और चीज़ से अवगत कराना चाहेंगे की क्या आपने कभी भी भगवान् शिव शंकर के अलावा किसी भी देवी देवता की तस्वीर पूरे परिवार अर्थार्थ पत्नी एवं बच्चो के साथ देखी है । आप विचारेंगे तो आपको जवाब ना ही मिलेगा ।

बस यही एक सबसे बड़ा कारण है की संपन्न परिवारों में सदैव महादेव की पूजा को विशेष दर्जा दिया गया है ।

संतो की वाणी से प्रेरित 

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