भगवान् का नाम



सनातन धर्म में भगवद नाम का सुमिरन सर्वोपरि बताया गया है। बड़े-बड़े संत-महात्माओ ने ईश्वर की प्राप्ति भगवद नाम से की है, तथा उन्होंने अपने जीवन-काल में सभी को इसके लिए प्रोत्साहित भी किया है। इसी भगवद नाम की महिमा से जुडी एक रोचक कहानी आज हम आप सब के सामने लेकर आये है।

पुराने समय की बात है। श्याम नाम का एक व्यक्ति सब्जी बेचने गाँव गाँव जाया करता था। वह सब्जी बेचते समय सभी को भगवान् कहकर बुलाया करता था। जैसे उससे अगर कोई पूछता- भैया आलू कैसे दिए ? तो वह कहता भगवन आलू 20 रूपये किलो है। उससे कोई पूछता गाजर कैसे दी ? तो वह कहता भगवन गाजर 30 रूपये किलो है। अगर कोई पूछता धनिया कैसे दिया तो वह कहता भगवन एकदम ताजा धनिया है मात्र 10 रूपये किलो। भगवान् नाम मानो उसकी जुबान पर हर वक़्त ही रहता था।

वह सबको भगवान् नाम से ही पुकारता था। इसलिए सभी लोग उसे भी भगवान् नाम से ही पुकारने लगे। उसे भगवान् कहना और सुनना बहुत अच्छा लगता था। वही गांव की एक औरत भगवान् की पूजा में दिन-रात लगी रहती थी। उस औरत को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। उसे लगता था जैसे वह भगवान् का अपमान कर रहा है।

एक दिन उस औरत ने सब्जी वाले को बुलाया और उससे गुस्से में पूछा - तुम सबको भगवान् कहकर क्यों बुलाते हो ?

उस औरत की बात सुनकर वह सब्जीवाला बोला- भगवान् मैं आपकी तरह बहुत अधिक पढ़ा
लिखा नहीं हूँ। सब्जी बेचने से पहले गांव में माँ बाप के साथ खेत में मजदूरी किया करता था। एक दिन हमारे गाँव में एक महात्माजी सत्संग रुपी आनंद करने के लिए आये। मैंने भी कई दिनों तक उस सत्संग का भरपूर आनन्द लिया। उन्होंने उस सत्संग में बहुत से अच्छे विचार लोगो के समक्ष रखे। परन्तु उनके द्वारा बताई गयी कोई भी बात मेरी समझ में नहीं आयी, सिवाय एक के मैंने उस बात को गाँठ बांधकर रख लिया।

महात्माजी ने बताया की हर एक इंसान के अन्दर भगवान् निवास करते है, बस जरूरत होती है, अपने भीतर बैठे भगवान् को पहचानने की। क्या पता किस इंसान में तुम भगवान् ढूंढ लो।जिससे तुम्हारे जीवन का उद्धार हो जाये। उनकी यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी। उस दिन मुझे वास्तव में लगा की भगवान् मेरे भीतर ही है, तथा सामने वाले के अन्दर है, या ये कह लो की सभी के भीतर है।

मैंने उसी दिन से सबको भगवान् कहकर पुकारना आरम्भ कर दिया। मेरे ऐसा करने से  वास्तव में मेरे जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो गया। अब मुझे किसी में भी कोई बुराई नजर नहीं आती। जिन लोगो से पहले नफरत किया करता था। उनमे भी अब मुझे भगवान् नजर आते है। किसी की वाणी में भगवान् दिखाई देते है। हर नर में नारायण है, और नारायण ही नर के रचियता है। उस सब्जी वाले की बात सुनकर उस औरत का मस्तक शर्म से झुक गया।

यही जीवन की वास्तिविकता है और हम इसी वास्त्वितिका से दूर भागते है | हम मन्दिर जाते है, मस्जिद जाते है, गुरूद्वारे जाते है, केवल उस भगवान् के दर्शन करने के लिए। लेकिन हम भगवान् स्वरुप इंसान से ही नफरत करे बैठे है। वास्तव में भगवान् मेरे अन्दर है आपके अन्दर  है संसार की हर एक वस्तु में वही सर्व-शक्तिमान स्थापित है। फूलो में भगवान् है, खुशबु में भगवान् है,पेड़-पौधो में सबमे भगवान् है यहाँ तक की निर्दोष जानवरो में भी भगवान् है | यह सब बाते वेदो और पुराणों में कही गयी है।

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