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Showing posts from May, 2019

रावण सारे रहस्य Hindi Spiritual & Religious Story

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“रावण” तो सिर्फ एक है दुनिया में इस नाम का कोई दूसरा व्यक्ति नही है। राम तो बहुत मिल जायेंगे लेकिन रावण नही। राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को दशानन भी कहते है। कहते है कि रावण लंका का तमिल राजा था। सभी ग्रंथो को छोडकर वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य में रावण का सबसे प्रमाणिक इतिहास मिलता है।
हिन्दू धर्म को मानने वाले सभी लोग राम सीता और रावण के बारे में अच्छी तरह जानते होंगे फिर भी रावण से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य भी है जो शायद आपने कही नही पढ़े होंगे। रामायण के अलग-अलग भागो से संग्रहित करके आज हम आपके सामने रावण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य लेकर आये है। जिससे पता चलता है कि रावण केवल दुराचारी ही नही था। बल्कि उसे धर्म में बहुत विश्वास भी था और उसे महाज्ञानी भी माना जाता है।
रावण के दादाजी का नाम प्रजापति पुलत्स्य था। जो ब्रह्माजी के दस पुत्रो में से एक थे। इस तरह देखा जाए तो रावण ब्रह्माजी का पडपौत्र हुआ। जबकि उसने अपने पिताजी और दादाजी से हटकर धर्म का साथ न देकर अधर्म का साथ दिया था।
हिन्दू ज्योतिषाशास्त्र में रावण संहिता को एक बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है लेकिन आपको जानकर हैरानी ह…

युधिष्ठिर का पूर्वाभास Hindi Spiritual & Religious Story

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पाण्डवों का अज्ञातवास समाप्त होने में कुछ समय ही शेष रह गया था। पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूँढ रहे थे। उधर शनिदेव की नज़र पाण्डवों पर पड़ी। शनिदेव के मन में विचार आया कि इन पाँचो में से अधिक बुद्धिमान कौन है इसकी परीक्षा ली जाय।
शनिदेव ने एक माया का महल बनाया उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।
अचानक भीम की नजर उस महल पर पड़ी और वह महल पर आकर्षित हो गया। भीम ने यधिष्ठिर से कहा कि भैया मुझे महल देखना है, युधिष्ठिर ने कहा, जाओ। भीम महल के द्वार पर पहुँचा। वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे, 
भीम ने कहा- मुझे महल देखना है !
शनिदेव ने कहा- महल देखने की कुछ शर्त है। पहली शर्त है कि महल में चार कोने हैं और आप एक ही कोना देख सकते हैं। दूसरी शर्त है कि महल में आप जो भी देखोगे उसकी पूर्णरूप से आपको व्याख्या करनी होगी। तीसरी शर्त यह है कि अगर व्याख्या नहीं कर सके तो इसी महल में आपको कैद कर लिया जाओगे।
भीम ने कहा- मुझे स्वीकार आपकी सभी शर्ते स्वीकार है और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया। वहाँ जाकर उसने अद्भूत पशु, पक्षी, फूल एवं फलों से लदे वृक्षों का अद्भुत न…

ठाकुर जी का विरह - Hindi Spiritual & Religious Story

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बाबा चुपचाप रथ पर कान्हा के वस्त्राभूषणों की गठरी रख रहे थे। दूर ओसारे में मूर्ति की तरह शीश झुका कर खड़ी यशोदा को देख कर कहा- दुखी क्यों हो यशोदा, दूसरे की बस्तु पर अपना क्या अधिकार?
यशोदा ने शीश उठा कर देखा नंद बाबा की ओर, उनकी आंखों में जल भर आया था। नंद निकट चले आये। यशोदा ने भारी स्वर से कहा- तो क्या कान्हा पर हमारा कोई अधिकार नहीं? ग्यारह वर्षों तक हम असत्य से ही लिपट कर जीते रहे?
नंद ने कहा- अधिकार क्यों नहीं, कन्हैया कहीं भी रहे, पर रहेगा तो हमारा ही लल्ला न! पर उसपर हमसे ज्यादा देवकी वसुदेव का अधिकार है, और उन्हें अभी कन्हैया की आवश्यकता भी है।
यशोदा ने फिर कहा- तो क्या मेरे ममत्व का कोई मोल नहीं? नंद बाबा ने थके हुए स्वर में कहा- ममत्व का तो सचमुच कोई मोल नहीं होता यशोदा। पर देखो तो, कान्हा ने इन ग्यारह वर्षों में हमें क्या नहीं दिया है। उम्र के उत्तरार्ध में जब हमने संतान की आशा छोड़ दी थी, तब वह हमारे आंगन में आया। तुम्हें नहीं लगता कि इन ग्यारह वर्षों में हमने जैसा सुखी जीवन जिया है, वैसा कभी नहीं जी सके थे। दूसरे की वस्तु से और कितनी आशा करती हो यशोदा, एक न एक दिन तो वह अ…

देवर्षि नारद का मोह - Hindi Spiritual and Religious Story

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एक बार देवर्षि नारद के मन में आया कि द्वारिकाधीश के पास बहुत सारे महल है, एक महल हमको भी मिल जाए तो यहीं आराम से टिक जायें, नहीं तो इधर-उधर घूमते रहना पड़ता है। यहीं सोचकर नारदजी ने द्वारिकाधीश से प्रार्थना की।
नारद जी ने भगवान् से कहा - "भगवन !" आपके पास बहुत से महल हैं, एक महल हमको मिल जाता तो हम भी आराम से रह लेते। आपके यहाँ खाने-पीने का इंतजाम भी अच्छा है। आराम से जीवन बसर हो जाता और आपके दर्शन भी होते रहते। भगवान् ने सोचा कि यह मेरा भक्त है, विरक्त संन्यासी है। अगर यह कहीं राजसी ठाठ-बाठ में पड़ गया तो थोड़े ही दिन में इसकी सारी विरक्ति, भक्ति निकल जायेगी। इसे अगर हम मना करेंगे तो यह बुरा मान जायेगा, लड़ाई-झगड़ा करेगा कि इतने महल हैं आपके पास और एक महल भी नहीं दे रहे हैं।
"भगवान् ने चतुराई से काम लिया, भगवन ने नारदजी से कहा" आप जाकर देख लीजिये, जिस महल में जगह खाली मिले वही आप रह लीजिये।" नारद जी वहाँ से चले।
भगवान् की तो 16108 रानियाँ और प्रत्येक रानी के 11-11 बच्चे भी थे।
सब जगह नारदजी घूम आये लेकिन कहीं एक महल भी खाली नहीं मिला, सब भरे हुए थे। आकर भगवान् से…

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है

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न क्षयति इति अक्षय” अर्थात जिसका कभी क्षय न हो उसे अक्षय कहते हैं और वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म होने के कारण इस दिन परशुराम जयन्ती मनाई जाती है। अक्षय तृतीया के दिन गंगा-स्नान करने एवं भगवान श्री कृष्ण को चन्दन लगाने की परम्परा है। मान्यता है कि इस दिन जिनका परिणय-संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है। इस दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान करने तथा "श्री सूक्त" के पाठ के साथ हवन करने का भी विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करने से माँ अवश्य ही कृपा करती है जातक को अक्षय पुण्य के साथ उसका जीवन धन-धान्य से भर जाता है। 
जानिए क्या है अक्षय तृतीया का महत्व, 
अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है,
*अक्षय तृतीया के दिन क्या करें,* जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान/ पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। यदि घर पर ही स्नान करना पड़े तो सूर्य उदय से पूर्व उठ कर एक बाल्टी में जल भर कर उस में गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिए। इस दिन भगवान श्रीकृष्…

साधुता से लालच पर विजय

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कुछ समय पूर्व एक बहुत ही पहुंचे हुए महात्मा हिमालय की तलहटी में निवास करते थे। अपने गुरु की आज्ञा से वे गाँव-गाँव में घूमकर अपने ज्ञान की गंगा पुरे देश में प्रवाहित कर रहे थे। वे किसी भी गाँव में अपना डेरा डालते और फिर वहाँ के लोगो में ज्ञान-रूपी गंगा का समावेश करते और अगले गाँव की और निकल पड़ते।
एक बार महात्मा घूमते-घूमते एक शहर के पास पहुंचे। लेकिन रात हो जाने के कारण शहर का दरवाज़ा बन्द हो गया था। महात्मा ने रात वही व्यतीत करके सुबह-सवेरे शहर में प्रवेश करने का विचार किया और वही दरवाज़े के पास बिछोना बिछाकर लेट गए।
उसी रात लम्बी बीमारी के चलते उस राज्य के राजा की मृत्यु हो गई। राजा के कोई संतान नहीं थी। इसीलिए राजगद्दी पर बैठने के लिए पूरा राज-परिवार झगड़ने लगा। सभी राजा के सिंहासन पर अपना अधिकार जताने लगे। राजगद्दी के लिए होने वाले झगडे का कोई हल न निकलते देख राज-दरबारियों ने एक अनोखा निर्णय लिया।
राज-दरबारियों ने सर्व-सहमति से यह निर्णय लिया की अगले दिन सुबह शहर का दरवाजा खुलने पर जो व्यक्ति सबसे पहले शहर के अन्दर कदम रखेगा उसी को राज्य का राजा घोषित कर दिया जाएगा। सभी ने राज-दरबारि…