रावण सारे रहस्य Hindi Spiritual & Religious Story



“रावण” तो सिर्फ एक है दुनिया में इस नाम का कोई दूसरा व्यक्ति नही है। राम तो बहुत मिल जायेंगे लेकिन रावण नही। राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को दशानन भी कहते है। कहते है कि रावण लंका का तमिल राजा था। सभी ग्रंथो को छोडकर वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य में रावण का सबसे प्रमाणिक इतिहास मिलता है।

हिन्दू धर्म को मानने वाले सभी लोग राम सीता और रावण के बारे में अच्छी तरह जानते होंगे फिर भी रावण से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य भी है जो शायद आपने कही नही पढ़े होंगे। रामायण के अलग-अलग भागो से संग्रहित करके आज हम आपके सामने रावण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य लेकर आये है। जिससे पता चलता है कि रावण केवल दुराचारी ही नही था। बल्कि उसे धर्म में बहुत विश्वास भी था और उसे महाज्ञानी भी माना जाता है।

रावण के दादाजी का नाम प्रजापति पुलत्स्य था। जो ब्रह्माजी के दस पुत्रो में से एक थे। इस तरह देखा जाए तो रावण ब्रह्माजी का पडपौत्र हुआ। जबकि उसने अपने पिताजी और दादाजी से हटकर धर्म का साथ न देकर अधर्म का साथ दिया था।

हिन्दू ज्योतिषाशास्त्र में रावण संहिता को एक बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रावण संहिता की रचना स्वयं रावण के द्वारा की गयी थी।

रामायण में एक जगह यह भी बताया गया है कि रावण ने भगवान राम के लिए यज्ञ किया था। वो यज्ञ करना रावण के लिए बहुत जरुरी था क्योंकि लंका तक पहुँचने के लिए जब रामजी की सेना ने पुल बनाना शुरू किया तो रामजी से युद्ध करने के लिए उसे भगवान् शिव का आशीर्वाद चाहिए था। तब शिवजी का आशीर्वाद पाने से पहले उसको रामजी की आराधना करनी पड़ी। रावण तीनो लोको का स्वामी था और उसने न केवल इन्द्रलोक बल्कि भूलोक के भी एक बड़े हिस्से को भी अपने अधीन कर लिया था।

रावण अपने समय का सबसे बड़ा विद्वान माना जाता था। रामायण में ऐसा उल्लेख मिलता है कि जब रावण मृत्यु शय्या पर लेटा हुआ था, तब रामजी ने लक्ष्मण को उसके पास बैठने को कहा था ताकि लक्ष्मण, रावण की मृत्यु से पहले उससे राजनीति तथा नियंत्रण करने की कला सिख सके।

रावण के कुछ चित्रों में आपने उसको वीणा बजाते हुए भी देखा होगा। एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण को संगीत का बहुत शौक था। वीणा बजाने में रावण को महारत हासिल थी। ऐसा कहा जाता है कि रावण जब कभी वीणा बजाता था तो उस वीणा से इतना मधुर स्वर निकलता था कि देवता भी उसका संगीत सुनने के लिए धरती पर आ जाते थे।

ऐसा माना जाता है कि रावण इतना शक्तिशाली था कि उसने नवग्रहों पर अपना अधिकार कर लिया था। कथाओं में बताया जाता है कि जब मेघनाथ का जन्म हुआ था तब रावण ने ग्रहों को 11 वे स्थान पर रहने को कहा था ताकि उसे अमरता मिल सके लेकिन शनिदेव ने ऐसा करने से मना कर दिया और 12 वे स्थान पर विराजमान हो गये। रावण इससे इतना नाराज हुआ कि उसने शनिदेव पर आक्रमण कर दिया और शनिदेव को बन्दी बना लिया।

रावण ये जानता था कि उसकी मृत्यु भगवान् विष्णु के हाथों लिखी हुई है और वह ये भी जानता था कि विष्णु के हाथो मरने से उसको मोक्ष की भी प्राप्ति होगी और उसके असुर रूप का विनाश होगा।

आप सभी ने रावण के दस मस्तकों की कहानी सूनी होगी इसमें विद्वानों के दो प्रकार के मत है एक मत के अनुसार रावण के दस मस्तक नही थे। वो केवल एक 9 मोतियों की माला से बना एक भ्रम था जो उसे उसकी  माता से प्राप्त हुआ था। दुसरे मत के अनुसार जो प्रचलित है कि जब रावण, आशुतोष भगवान् शिव-शंकर के दर्शन करने के लिए कैलाश पंहुचा। तो कैलाश पर भगवान् शिव-शंकर को ना पाकर रावण ने शिव-ताण्डव स्तोत्र का पाठ शुरू किया तथा पाठ की समाप्ति के साथ ही एक-एक करके दस मस्तक भगवान शिव-शंकर को अर्पित करने लगा। जब शिवजी ने उसकी भक्ति देखी तो उससे प्रसन्न होकर उसे पुनः जीवित किया।

शिवजी ने ही रावण को रावण नाम दिया था। ऐसा कथाओं में बताया जाता है कि रावण शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था लेकिन शिवजी राजी नही थे तो उसने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया। इसलिए शिवजी ने अपना एक पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया जिससे रावण की अंगुली दब गयी थी। दर्द के मारे रावण जोर से चिल्लाया लेकिन शिवजी की ताकत को देखते हुए उसने शिव ताण्डव किया था। शिवजी को ये बहुत अजीब लगा कि दर्द में होते हुए भी उसने शिव ताण्डव किया तो उसका नाम रावण रख दिया जिसका अर्थ होता है तेज आवाज में दहाड़ने वाला।

जब रावण युद्ध में हार रहा था और अपनी तरफ से अंतिम शेष प्राणी जब वही बचा था तब रावण ने यज्ञ करने का निश्चय किया जिससे तूफ़ान आ सकता था लेकिन यज्ञ के लिए उसको पुरे यज्ञ के दौरान एक जगह बैठना जरुरी था।

जब राम जी को इस बारे में पता चला तो रामजी ने बाली पुत्र अंगद को रावण के यज्ञ में बाधा डालने के लिए भेजा। कई प्रयासों के बाद भी अंगद यज्ञ में बाधा डालने में सफल नही हुआ। तब अंगद इस विश्वास से रावण की पत्नी मन्दोदरी को घसीटने लगा कि रावण ये देखकर अपना स्थान छोड़ देगा लेकिन वो नही हिला।

तब मन्दोदरी रावण के सामने चिल्लायी और उसका तिरस्कार किया और रामजी का उदाहरण देते हुए कहा की “एक राम है जिसने अपनी पत्नी को मुक्त कराने के लिये युद्ध किया और दुसरी तरफ आप है जो अपनी पत्नी को बचाने के लिए अपनी जगह से हिल भी नहीं रहे”। यह सुनकर अन्त में रावण उस यज्ञ को पूरा किये बिना वहा से उठ गया।

एक और रोचक तथ्य यह है की रावण और कुम्भकर्ण अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय थे जिनको एक ऋषि के द्वारा प्राप्त श्राप के कारण राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था और अपने ही आराध्य से उनको लड़ना पड़ा था।

राम - रावण के बातचीत में एक बार रामजी ने रावण को महा-ब्राहमण कहकर पुकारा था क्योंकि रावण 64 कलाओं में निपुण था। जिसके कारण उसे असुरो में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति माना जाता था।

ऐसा कहा जाता है कि रावण महिलाओं से बहुत आकर्षित था। अपनी इसी कमजोरी के कारण जब वो नल-कुबेर की पत्नी को अपने वश में करने की कोशिश करता है तो नल-कुबेर की पत्नी उसको श्राप देती है कि रावण तू अपने जीवन में किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के बिना स्पर्श नही कर सकता। अगर तूने किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के बिना स्पर्श किया तो तेरा विनाश हो जाएगा। यही कारण था कि रावण ने सीता को नही छुआ था।

हम हमेशा पढ़ते है कि रावण ने सीता का हरण किया था जबकि जैन ग्रंथो की रामायण के अनुसार रावण सीता का पिता था जो एक हिन्दू धर्म के लोगो को बहुत अजीब बात लगती है।

रावण को अपने दस सिरों की वजह से दशग्रीव कहा जाता है जो उसकी अद्भुत बुद्धिमता को दर्शाता है।
रावण अपने समय में विज्ञान का बहुत बड़ा विद्वान भी था जिसका उदाहरण पुष्पक विमान था। जिससे पता चलता है कि उसे विज्ञान का काफी ज्ञान था।

भारत का क्लासिकल वाद्य यंत्र रूद्र वीणा की खोज रावण ने ही की थी। रावण शिवजी का बहुत बड़ा भक्त था और दिन रात उनकी आराधना करता रहता था।

रावण के बहुत से नाम थे जिसमे दशानन सबसे लोकप्रिय नाम था। रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी था। आदर्श भाई का फ़र्ज़ निभाते हुए उसने अपनी बहन सूर्पनखा के अपमान का बदला लेने के लिए सीता का अपहरण किया, जो उसकी मौत का कारण बना।

दूसरा उसने अपनी पत्नी को बचाने के लिए यज्ञ को बीच में ही छोड़ दिया। जिससे वो राम जी की सेना को तबाह कर सकता था। इसके अलावा जब कुम्भकर्ण को ब्रह्माजी से हमेशा के लिए नींद में सो जाने का वरदान मिला था तब रावण ने तपस्या करके इसकी अवधि को 6 महीने किया था। जिससे पता चलता है कि उसको अपने भाई-बहनों और पत्नी से कितना प्रेम था।

कुछ लोग ऐसा मानते है कि लाल किताब का असली लेखक रावण ही था। ऐसा कहा जाता है कि रावण अपने अहँकार की वजह से अपनी शक्तियों को खो बैठा था। जिसके कारण उसने लाल किताब का प्रभाव खो दिया था जो बाद में अरब में पायी गयी थी जिसे बाद में उर्दू और पारसी में अनुवाद किया गया था।

रावण बाली से एक बार पराजित हो चूका था। कहानी इस प्रकार है कि बाली को सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त था और रावण शिवजी से मिले वरदान के अहँकार से बाली को चुनौती दे बैठा। बाली ने शुरुवात में ध्यान नही दिया लेकिन रावण ने जब उसको ज्यादा परेशान किया तो बाली ने रावण के सिर को अपनी भुजाओं में दबा लिया और उड़ने लगा। उसने रावण को 6 महीने बाद ही छोड़ा ताकि वो सबक सीख सके।

प्रभु श्रीराम को जब रावण को हराने के लिये समुद्र पार कर लंका जाना था तो कार्य शुरू करने से एक रात पहले उन्होंने एक यज्ञ की तैयारी की और रामेश्वरम में भगवान शिवजी की आराधना करने का निश्चय किया। अब जब वो सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से युद्ध करने को जा रहे थे तो यज्ञ के लिए भी उनको एक विद्वान पण्डित की आवश्कता थी।

उन्हें जानकारी मिली कि रावण खुद एक बहुत बड़ा विद्वान है। राम जी ने रावण को यज्ञ के लिए न्योता भेजा और रावण शिवजी के यज्ञ के लिए मना नही कर पाया। रावण रामेश्वरम पहुँचा और उसने यज्ञ पूर्ण करवाया। इतना ही नही जब यज्ञ पूरा हुआ तब रामजी ने रावण से उसी को हराने के लिए आशीर्वाद भी माँगा और जवाब में रावण ने उनको “तथास्तु” भी कहा था।

एक और रोचक तथ्य है की लंका का निर्माण विश्वकर्मा जी ने किया था और जब उस पर रावण के सौतेले भाई कुबेर ने अतिक्रमण कर लिया था। जब रावण तपस्या से लौटा तब उसने कुबेर से पुरी लंका छीन ली। ऐसा कहा जाता है की उसके राज्य में गरीब से गरीब का घर भी उसने सोने से तैयार किया था जिसके कारण उसकी लंका नगरी में खूब ख्याति थी।

दक्षिण भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कई हिस्सों में रावण को आज भी पूजा जाता है और उसके अनेको भक्त भी है। कानपुर में एक कैलाश मन्दिर है जो साल में एक बार दशहरे के दिन खुलता है जहाँ पर रावण की पूजा होती है। इसके अलावा रावण को आन्ध्रप्रदेश और राजस्थान के भी कुछ हिस्सों में पूजा जाता है।

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