गीता विभिन्न सन्दर्भों में भाग -1


साधारणतया हम "भगवद गीता" को ही "गीता" मानते हैं जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में समझाया है। परन्तु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय परंपरा के अनुसार कुल 60 तरह की गीता हैं जो भक्तों के हृदय और भारतीय सांस्कृतिक विरासत में अपना अलग महत्व रखती हैं। गीता गीत या छंद रूप में है जो मानव हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

आइये सभी तरह की गीता के बारे में संक्षेप में जानते हैं -

1. गुरु गीता - इसमें भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच वार्तालाप को बताया है। इसमें आध्यात्मिक गुरु की तलाश के महत्व और आवश्यकता पर जोर दिया है। इसका वर्णन स्कंध पुराण में मिलता है।

2. अष्टावक्र गीता - इसमें महात्मा अष्टावक्र और राजा जनक की मध्य वार्तालाप को बताया है। यह अद्वैत वेदांत, बंधन और आत्मबोध के बारे में बताती है। यह मानव शरीर की कमजोरियों और अष्टावक्र के प्रतीक के रूप में उसके कष्टों को इंगित करने की श्रेष्ठता पर जोर देता है। महाभारत के वन पुराण में इसका वर्णन मिलता है।

3. अवधूत गीता - इसमें ऋषि दत्तात्रेय और स्कंद (भगवान कार्तिकेय) के बीच वार्तालाप को बताया है। इसमें एक वास्तविक आत्मा के उच्चतम अहसास का संकेत मिलता है।

4. भगवद गीता - इसमें महाभारत युद्ध की पूर्व संध्या पर भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के मध्य हुई वार्तालाप को बताया है। यह गीता का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है।

5. अनु गीता - इसमें अर्जुन और श्री कृष्ण की वार्तालाप का वह भाग है जिसमे अर्जुन श्री कृष्ण से पुनः संपूर्ण भगवद गीता सुनाने को कहते हैं और श्री कृष्ण इसे असंभव बताकर केवल भगवद गीता का सार सुनाते हैं। इस सार को अनु गीता कहा गया है।

6. ब्रह्म गीता - महर्षि वशिष्ठ और श्री राम के मध्य की वार्तालाप को इसमें बताया गया है। इसमें वशिष्ठ योग के निर्वाण प्रकरण का वर्णन मिलता है। इसमें ब्राह्मण के स्वभाव, विश्व और आत्मा का गहराई से वर्णन मिलता है।

7. जनक गीता - अपने महल के समीप सिद्धों द्वारा गाये गए गीतों को सुनकर राजा जनक द्वारा लिखे गए श्लोकों का संग्रह इसमें मिलता है।

8. राम गीता प्रथम - इसमें श्री राम और उनके भाई श्री लक्ष्मण के मध्य वार्तालाप को दर्शाया गया है। इसमें जीव, अविद्या, ईश्वर, माया आदि के अपने विभिन्न सिद्धांतों के साथ अद्वैत-वेदांत का विस्तार से वर्णन मिलता है और अनन्त होने, ब्रह्म की प्राप्ति की प्रक्रिया का वर्णन है। इसे आध्यात्म रामायण में दर्शाया गया है।

9. राम गीता द्वितीय - इसमें श्री राम और भगवान हनुमान के मध्य वार्तालाप को दर्शाया गया है। यह अनुभववादियों का धर्मग्रंथ है और यह संसार से निवृत्ति से हटकर ज्ञान प्राप्त करने पर बल देता है। इसका वर्णन तत्व सरयन में मिलता है।

10. ऋभु गीता - ऋषि ऋभु द्वारा अपने शिष्य निदघ को दिए गए निर्देशों का वर्णन इसमें मिलता है। यह अद्वैत वेदांत से संबंधित एक प्रशंसित गीता है और यह शिवाराशि पुराण के हृदय का निर्माण करती है जो शिव और शैव उपासना के बारे में उपपुराणों में से एक है।

11. सिद्ध गीता - इसमें राजा जनक के महल के समीप सिद्धों द्वारा गाये गए गीतों का संकलन मिलता है। इसका सार है कि अनंत में चेतना का विस्तार सदैव आत्म-नियंत्रण और विषय-वस्तु संबंध की उपेक्षा से प्रभावित होता है। इसका वर्णन वशिष्ठ-योग के उपशांति प्रकरण में मिलता है।

12. उत्तर गीता - यह भगवद गीता का एक परिशिष्ठ है जिसका वर्णन ब्रह्माण्ड पुराण में मिलता है। इसमें ज्ञान, योग तथा सम्बद्ध विषयों का उचित वर्णन मिलता है।

13. वशिष्ठ गीता - इसमें महर्षि वशिष्ठ द्वारा श्री राम को शाश्वत सत्य पर दिए गए निर्देशों का वर्णन मिलता है। इसका वर्णन वशिष्ठ-योग के निर्वाण-प्रकरण में मिलता है।

14. बक गीता - भगवान इन्द्र और महर्षि बक के मध्य वार्तालाप जिसमे महर्षि लम्बे समय तक दुनिया में रहने वाले व्यक्ति द्वारा देखे जाने वाली दुखद स्थितियों का वर्णन करते हैं। इसका वर्णन महाभारत में मिलता है।

15. भिक्षु गीता - इसमें एक लालची ब्राह्मण उद्धव को श्री कृष्ण द्वारा दिए गए उद्धरणों का उल्लेख मिलता है जो की बाद में एक साधु बन जाता है और मन को नियंत्रित रखने की विधि पर एक गीत गाता है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

16. गोपी गीता - इसमें गोपियों द्वारा श्री कृष्ण के वियोग में गाया गया गीत है। यह गीता भगवान के प्रति सर्वोच्च भक्ति-भाव से परिपूर्ण है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

17. हंसा गीता - इसमें हंस रूप में भगवान विष्णु और ब्रह्मा के पुत्रों के मध्य के वार्तालाप को बताया है। इस गीता के अनुसार संसार एक भ्रम है और केवल आत्मा ही अटल और सर्वदा रहने वाला एकमात्र सत्य है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है। इसे उद्धव गीता के नाम से भी जाना जाता है।

18. जीवनमुक्त गीता - महर्षि दत्तात्रेय जीवनमुक्त की प्रकृति (आत्मा के एहसास) की व्याख्या करते हैं।

19. कपिल गीता - इसमें महर्षि कपिल द्वारा अपनी माता देवहुति को पढ़ाने का वर्णन है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

20. नहुष गीता - इसमें युधिष्ठिर और नहुष के मध्य वार्तालाप का वर्णन मिलता है। इसका वर्णन महाभारत में मिलता है।

21. नारद गीता - इसमें भगवान श्री कृष्ण और नारद जी के मध्य वार्तालाप का वर्णन मिलता है। यह एक आध्यात्मिक आकांक्षी के सामान्य अपेक्षित व्यवहार करता है। यह गुरु या आध्यात्मिक उपदेशक की सर्वोच्चता पर जोर देता है।

22. पांडव गीता - इसमें भगवान नारायण के लिए विभिन्न भक्तों द्वारा की गयी प्रार्थनाओं को संगृहीत किया गया है। इसे प्रपन्न गीता के नाम से भी जानते हैं। इस गीता को समर्पण के गीत के रूप में जाना जाता है। यह विभिन्न स्रोतों से लिए गए सुंदर छंदों का संग्रह है। इस गीता में वर्णित भजन को पांडवों द्वारा गाया गया था क्योंकि यह सभी पापों को नष्ट करने और मुक्ति प्रदान करने के लिए कहा गया था।

23. ऋषभ गीता - इसमें दुनिया के लाभ हेतु मुक्ति के मार्ग और शाश्वत सत्य के बारे में ऋषि ऋषभ द्वारा अपने बच्चों को दिए गए निर्देशों का वर्णन मिलता है।

24. शौनक गीता - इसमें सृष्टि के प्राणियों के सामान्य जीवन के रहस्यों पर युधिष्ठिर को ऋषि शौनक के निर्देश उल्लेखित हैं। इसका वर्णन महाभारत के अरण्य-पर्व में मिलता है।

25. श्रुति गीता - इसमें श्रुतियों द्वारा भगवान नारायण को अर्पित की गई प्रार्थनाओं का संकलन है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

26. युगल गीता - इसमें गोपिओं द्वारा किया गया भगवान कृष्ण का महिमा वर्णन है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

27. व्याध गीता - इसमें एक व्याध (शिकारी) द्वारा ऋषि कौशिक को दिया गया उपदेश है। इसका वर्णन श्रीमद भागवतम में मिलता है।

28. युधिष्ठिर गीता - इसमें यक्ष और युधिष्ठिर के मध्य वार्तालाप को संकलित किया गया है।  इसका वर्णन महाभारत में मिलता है। यह गीता मूल नैतिकता के बारे में सिखाती है जो सदाचार और दिव्य जीवन का आधार बनती है।
29. मोक्ष गीता - इसमें स्वामी शिवानंद द्वारा लिखित मुक्ति गीतों का संकलन है।

30. रमण गीता - यह गीता श्री वशिष्ठ गणपति मुनि द्वारा रचित, भगवान श्री रमण महर्षि की शिक्षाओं का प्रतीक है।


अन्य प्रकार की गीता के बारे में जानकारी के लिए "गीता विभिन्न सन्दर्भों में भाग -2" देखे

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