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Showing posts from August, 2019

भगवान श्री गणेश जी प्रथम पूज्य क्यों है ? (God Ganesh)

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प्राचीन काल की बात है - नैमिषारण्य क्षेत्र में ऋषि-महर्षि साधु-संतों का समाज जुड़ा था। उसमें श्रीसूतजी भी विद्यमान थे। शौनक जी ने उनकी सेवा में उपस्थित होकर निवेदन किया कि "हे अज्ञान रूप घोर तिमिर को नष्ट करने में करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान श्रीसूतजी ! हमारे कानों के लिए अमृत के समान जीवन प्रदान करने वाले कथा तत्व का वर्णन कीजिये। हे सूतजी ! हमारे हृदयों में ज्ञान के प्रकाश की वृद्धि तथा भक्ति, वैराग्य और विवेक की उत्पत्ति जिस कथा से हो सकती हो, वह हमारे प्रति कहने कि कृपा करें।"
शौनक जी की जिज्ञासा से सूतजी बड़े प्रसन्न हुए। पुरातन इतिहासों के स्मरण से उनका शरीर पुलकायमान हो रहा था। वे कुछ देर उसी स्थिति में विराजमान रहकर कुछ विचार करते रहे और अंत में बोले - "शौनक जी ! इस विषय में आपके चित में बड़ी जिज्ञासा है। आप धन्य हैं जो सदैव ज्ञान की प्राप्ति में तत्पर रहते हुए विभिन्न पुराण-कथाओं की जिज्ञासा रखते हैं। आज मैं आपको ज्ञान के परम स्तोत्र श्री गणेश जी का जन्म-कर्म रूप चरित्र सुनाऊँगा। गणेशजी से ही सभी ज्ञानों, सभी विद्याओं का उदभव हुआ है। अब आप सावधान चित्त से वि…

आखिर क्या है पंच कैलाश?

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हमारे भारत और तिब्बत में स्थित 5 अलग-अलग कैलाश पर्वत हैं जिन्हें सम्मिलित रूप से पंच कैलाश नाम दिया गया है। शिव भक्तों के लिए मोक्ष प्राप्ति हेतु पंच कैलाश यात्रा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। सभी 5 कैलाश हिमलाय पर्वतश्रृंखला में स्थित हैं। अधिकांश यात्री पंच कैलाश यात्रा को सत्य की यात्रा और एक महान आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव मानते हैं। आइये पंच कैलाश यात्रा में सम्मिलित कैलाश पर्वतों के बारे में संक्षिप्त में जानते हैं।
1. आदि कैलाश (छोटा कैलाश) आदि कैलाश (छोटा कैलाश) भारत तिब्बत सीमा के बिलकुल पास भारतीय सीमा क्षेत्र के अंदर स्थित है। छोटा कैलाश उत्तराखंड के धारचूला जिले में स्थित है। यह क्षेत्र उत्तम प्राकृतिक सुंदरता, शांति और सम्प्रभुता से भरा पूरा है। यह क्षेत्र बहुत ही शांत है, शांति की तलाश कर रहे यात्रियों के लिए यह स्थान अति उत्तम साबित होता है। बहुत से लोग एक सामान रूप के चलते आदि कैलाश और मुख्य कैलाश में भ्रमित हो जातें हैं। आदि कैलाश के समीप एक झील स्थित है जिसे "पार्वती ताल" कहा जाता है।
2. किन्नौर कैलाश किन्नौर कैलाश हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की कि…

भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी कुछ खास बातें।

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हिन्दू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का एक रूप माना गया है। धर्मग्रंथों (पुराणों) के अनुसार भगवान दत्तात्रेय विष्णु के छठे अवतार कहे जाते हैं। वह सर्वव्यापी कहलाये क्योंकि वह आजन्म ब्रह्मचारी  और एक सन्यासी रहे थे। इसी कारण से तीनों ईश्वरीय शक्ति के रूप भगवान दत्तात्रेय की आराधना बहुत सफल, सुखदायी और तुरंत फलदायी मानी जाती है। मन, कर्म और वाणी से की गयी इनकी उपासना भक्त को हर तरह की कठिनाइयों से मुक्ति दिलाती है।
ऐसा कहा जाता है कि भगवान भोले (शिव) का साक्षात् रूप दत्तात्रेय में मिलता है। जब वैदिक कर्मों का, धर्म का और वर्ण व्यवस्था का लोप हो गया था, तब भगवान दत्तात्रेय ने सबका पुनरुद्धार किया था। कृतवीर्य के बड़े पुत्र अर्जुन ने अपनी सेवाओं से इन्हें प्रसन्न कर चार वर प्राप्त किये थे।
पहला: बलवान, सत्यवादी, मनस्वी, आदोषदर्शी तथा सहभुजाओं वाला बनने का। दूसरा: जरायुज और अंडज जीवों के साथ-साथ समस्त चराचर जगत का शासन करने के सामर्थ्य का। तीसरा: देवता, ऋषियों, ब्राह्मणों आदि का यजन करने तथा शत्रुओं का संहार कर पाने का। चौथा: इहलोक (पृथ्वीलोक), स्वर्गलोक…