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Showing posts from December, 2019

(गोपी चन्दन) तिलक क्यों लगाया जाता हैं।

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आपने और हमने अपने बड़े बुजुर्गो की तस्वीरों को देखा होगा। उनकी तस्वीर में वे सदैव मस्तक पर तिलक लगाया करते थे। क्या आपने कभी सोचा है वे ऐसा क्यों करते थे, इसके पीछे कारण क्या था। तो आईये आज हम जानेंगे की क्यों हमारे पूर्वज सदैव तिलक लगाया करते थे।
आज हिन्दुओं के घर से तिलक लगाने की परम्परा लुप्त हो चुकी है, कुछ वैष्णवों को छोड़कर सभी बिना तिलक लगाए ही अपने दिन की शुरुआत करते है। क्या आप जानते है की तिलक लगाने के पीछे क्या तथ्य है, तिलक लगाना केवल एक परम्परा नहीं है इसके पीछे पुरातन काल की एक घटना का ज़िक्र आता है।
कई सालो पहले की बात है एक राजा था बड़ा ही दुराचारी और कठोर प्रवृति का उसके राज्य में सभी दुखी थे, उसके पडोसी राज्य के राजा भी, उसके पड़ोस के राजा ने विचार किया की अगर इस राजा का अन्त कर दिया जाये तो सारी समस्या ही समाप्त हो जायेगी। परन्तु वह जानता था की इस दुराचारी और कठोर प्रवृति के राजा को युद्ध में हराना लगभग असम्भव है।
इसलिए उस राजा को मारने के लिए पडोसी राज्य के राजा ने षड्यंत्र रचा। राजा ने अपने गुप्तचरों से उस राजा की दिनचर्या की जानकारी जुटाने के लिए कहा। गुप्तचरों की जा…

शमशान में महिलायें क्यों नहीं जाती हैं।

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आप सभी ने देखा होगा की कभी भी महिलायें अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होती और ना ही शमशान जाती हैं। इसके पीछे के कारणों का क्या आपने कभी विचार किया की ऐसा क्यों होता है। आइये जानते हैं की आखिर क्यों महिलायें अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होती और ना ही शमशान में प्रवेश करती है।
ऐसा नहीं हैं की महिलाओं को शमशान में जाने नहीं दिया जाता, पहले के समय में महिलायें शमशान जाया करती थी परन्तु इतिहास में एक समय ऐसा आया जब ब्रह्माजी के द्वारा महिलाओं का शमशान में जाने पर पाबंदी लगा दी गयी।
बात तब की हैं जब हिंदुस्तान पर राज्य राजा हरिश्चंद्र का था। उनके राज्य में किसी प्रकार की हिंसा या चोरी-चकारी नहीं होती थी। एक बार स्वर्ग में बहस छिड़ गयी की इस युग में कोई भी ऐसा नहीं है जो सत्य के मार्ग पर चलता हो, उसी समय ऋषि विश्वामित्र ने कहा की ऐसा नहीं है। आज भी एक इंसान ऐसा है जिसका जीवन सत्य पर आधारित है, उनका नाम है राजा हरिश्चंद्र। इस बात को मानने से देवताओं ने इंकार कर दिया और परीक्षा का प्रमाण देने को कहा।
इस बात को सत्य साबित करने के लिए ऋषि विश्वामित्र ने कहा की मैं खुद परीक्षा लूँगा और उसी समय वे रा…

स्वस्तिक कब क्यों कहाँ बनाते हैं

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स्वस्तिक सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण मांगलिक प्रतीक चिन्ह है। किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वस्तिक बनाया जाता है। क्या आप जानते है स्वस्तिक क्या है, क्यों बनाते हैं और इससे क्या लाभ मिलता है ? आइये जानें ये महत्वपूर्ण बातें

स्वस्तिक क्या है स्वस्तिक सनातन धर्म का एक सांकेतिक चिन्ह है जिसमें लम्बी और आड़ी रेखा समकोण पर मिला कर एक विशेष तरीके से और आगे बढ़ाई जाती हैं। इसके चारों कोनो में बिंदु लगाए जाते हैं। इस चिन्ह को परमात्मा स्वरुप तथा अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। विश्व भर में इससे मिलते जुलते चिन्ह हजारों वर्ष पहले से उपयोग में लाये जाते रहे हैं।

स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है स्वस्तिक दो शब्दों से बना है – सु + अस्ति. इसका अर्थ है – शुभ हो अर्थात मंगलमय, कल्याणमय और सुशोभित अस्तित्व हो। यह शाश्वत जीवन और अक्षय मंगल को प्रगट करता है।

स्वस्तिक सभी के लिए शुभ, मंगल तथा कल्याण भावना को दर्शाता है। इसे सुख समृद्धि तथा परमात्मा का प्रतीक माना जाता है। अतः शुभ कार्य में सबसे पहले स्वस्तिक बनाया जाता है।

इसके अलावा यह चारों दिशाओं के अधिपति – पूर्व के इंद्र, पश्चिम के वरुण, उत्तर के कु…