असीम रहस्यों वाला मंदिर जगन्नाथ पूरी

Jagannathpuri mandir


हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यतओं में चारो धामों को एक युग का प्रतिक माना जाता है। भगवान् जगन्नाथ पूरी मंदिर के बारे में जानकारी सनातन धर्म के सभी ग्रंथो में मिलता है। इस तरह कलयुग का पवित्र धाम जगन्नाथ पूरी को माना गया है। एक ऐसा धाम जहाँ आषाढ़ के महीने में दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु उमड़ते है। हर साल होने वाली भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा में लाखों लोग शामिल होते है और भगवान् जगन्नाथ के साथ साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का रथ भी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते है। भगवान् जगन्नाथ धाम की ऐसी परम्परा जो पिछले पांच सौ सालो में भी फीकी नहीं हुई। पूरी दुनिया में जहाँ भी भगवान् श्रीकृष्ण का मंदिर होता है वहाँ श्रीकृष्ण के साथ श्रीराधा की ही मूर्ति मिलती है परन्तु जगन्नाथ पूरी में श्रीकृष्ण के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्ति मिलती है। इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है कहते है एक बार श्रीकृष्ण में स्वप्न में राधा का नाम लिया यह नाम सुनकर भगवान् श्रीकृष्ण की पत्नी रुकमणीजी हैरान रह गयी और उन्होंने राधा की पूरी कहानी पता लगाने की ठानी। कथा कहती है की वो रोहिणीजी थी जिन्होंने रुकमणीजी को राधाकृष्णा की पूरी कहानी सुनाई और कथा शुरू करने से पहले सुभद्रा को पहरे पर बिठा दिया। कहते है की सुभद्रा की पहरेदारी को लेकर ही कान्हा और बलभद्र में भिड़ंत हो गयी और यह भिड़ंत नारदजी को भा गयी। उन्होंने भगवान् श्रीकृष्ण से आग्रह किया की आप तीनो इसी रूप में धरती पर मूर्ति रूप में स्थित हो जाए। और तथास्तु कह कर भगवान् श्रीकृष्ण मूर्ति रूप में उसी स्थान पर विराजमान हो गए। यह दास्ताँ आज भी उड़ीसा के गानों में और भक्तो की कथाओं में जीवित मिलती है।

क्या आप जानते है सैकड़ों साल पुराना यह मंदिर अपने अन्दर कई गहरे राज समेटे हुए है। इस मंदिर से इतने चमत्कार जुड़े हुए है की विज्ञान भी उसके आगे नतमस्तक है।

जगन्नाथ पूरी मंदिर का गुम्बद विज्ञान के लिए किसी पहेली से कम नहीं है। यह एक ऐसा मंदिर है जिसमे करोड़ों लोगो की आस्था है इस मंदिर में ऐसे रहस्य है जो आज तक उजागर नहीं हुए या ये कहना भी गलत नहीं होगा की शायद कभी उजागर होंगे भी नहीं। इस मंदिर से जुड़ा गुमबद और उस पर लगा ध्वज एक कहानी बताते है। ऐसी कहानी जिस पर विश्वास करना मुश्किल है। यहाँ तक की भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा में उमड़ने वाला जन सैलाब भी दुनिया में सबसे अधिक माना जाता है। आइये आज आपको परम धाम जगन्नाथ पूरी के इन्ही दस राजो के बारे में जानकारी देते है।

भगवान् जगन्नाथ मंदिर से जुड़े दस राज


भगवान् जगन्नाथ का ध्वज

भगवान् जगन्नाथ पूरी के मंदिर के ऊपर लहराने वाला ध्वज भी किसी चमत्कार से कम नहीं है आपने हमेशा यही सुना होगा की किसी कपडे को अगर हवा में फैलाया जाए तो वो सदा हवा की दिशा में ही लहराता है, परन्तु आपको यह जानकर हैरानी होगी की जगन्नाथ पूरी के गुम्बद पर लगा ध्वज सदा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है यानी की अगर हवा पूर्व से पश्चिम की और बाह रही है तो ये ध्वज पश्चिम से पूर्व की और लहराएगा। ऐसा क्यों होता है यह रहस्य वैज्ञानिक भी नहीं जानते लेकिन यह बहुत आश्चर्यजनक है। यह भी आश्चर्य है की हर रोज़ श्याम को एक व्यक्ति लगभग पैतालीस मंजिल चढ़कर इस मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को उल्टा चढ़ाकर बदलता है ताकि ऐसा लगे के यह ध्वज सीधी दिशा में लहरा रहा है। यह ध्वज भी इतना भव्य है की इसे सब देखते ही रह जाते है। ध्वज पर शिव का चंद्र भी बना हुआ है। 

भगवान् जगन्नाथ का रहस्य्मयी गुम्बद

भगवान् जगन्नाथ का मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा और विशालकाय मंदिर है। यह मंदिर चार लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसकी उचाई लगभग 264 फुट है। मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुम्बद देख पाना असंभव है और आपको जानकर आश्चर्य होगा की इस गुम्बद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है यानी इसकी छाया दिखाई नहीं देती। हमारे पूर्वज कितने महान इंजीनियर रहे होंगे यह इस मंदिर को देखकर जाना जा सकता है। पूरी के मंदिर का यह भव्य रूप सातवीं शताब्दी में बनाया गया था।

भगवान् जगन्नाथ मदिर के गुम्बद पर लगा सुदर्शन चक्र

भगवान् जगन्नाथ पूरी के गुम्बद के ऊपर लगा सुदर्शन चक्र भी किसी रहस्य से कम नहीं है। मंदिर के गुम्बद पर लगा यह सुदर्शन चक्र आपको पूरी में किसी भी दिशा से देखने पर भी आपको यह सीधा ही लगा हुआ प्रतीत होगा यानी हमेशा यह सामने ही दिखाई देता है। इसे नील चक्र भी कहा जाता है यह अष्ट धातु से बना है और बेहत पवित्र माना जाता है। 

भगवान् जगन्नाथ पूरी में बहने वाली हवा 

धरती पर सभी जगह दिन में हवा समुद्र से जमीन की और बहती है और श्याम को तथा रात्रि में जमीन से समुद्र की और बहती है। परन्तु जगन्नाथ पूरी में दिन के समय हवा जमीन से समुद्र की और जाती है और रात्रि में हवा समुद्र से जमीन की और आती है। 

भगवान् जगन्नाथ के गुम्बद के ऊपर से नहीं उड़ते परिंदे

आप ने सभी जगहों पर परिंदो को बैठे या उड़ते हुए देखा होगा परन्तु आपको आश्चर्य होगा की सिर्फ भगवान् जगन्नाथ पूरी का गुम्बद एक ऐसी जगह है जहाँ परिंदे ना तो बैठते है और ना ही उसके ऊपर से उड़ते है। इसके ऊपर से किसी भी तरह का विमान भी नहीं उड़ाया जा सकता।

भगवान् जगन्नाथ पूरी का रसोईघर

भगवान् जगन्नाथ पूरी में बना रसोईघर दुनिया में सबसे बड़ा है और उतनी की विशाल है यहाँ के रसोइयों की संख्या। 500 रसोइयों और 300 सहयोगियों के साथ मिलकर यहाँ भगवान् जगन्नाथ के प्रसाद को बनाया जाता है। यह रसोई इतनी बड़ी है की यहाँ रोज 20,00,000 लोगो के लिए प्रसाद बनाया जाता है। ऐसा कहते है की इस रसोई में बने प्रसाद की एक अध्भुत बात यह है की चाहे यहाँ प्रसाद कुछ हजार लोगो के लिए ही बनाया जाये तो भी यह प्रसाद लाखो लोगो का पेट भरने के लिए काफी होता है और आपको जानकर हैरानी होगी की यहाँ सदा एक ही मात्रा में प्रसाद बनाया जाता है फिर भी आज तक यह कभी भी कम नहीं पड़ा चाहे जन सैलाब जितना भी आये। और सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है की यहाँ कभी भी अन्न का एक दाना भी व्यर्थ नहीं बचता।
जितने श्रद्धालु आते है उतना ही प्रसाद बनता है ना कम ना ही ज्यादा तथा ऐसा भी कहा जाता है की भगवान् जगन्नाथ पूरी के मंदिर के अन्न स्थल में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती।

भगवान् जगन्नाथ पूरी मंदिर तक आने वाली समुद्र की आवाज

आपको जानकर हैरानी होगी की आप जैसे ही भगवान् जगन्नाथ पूरी धाम के प्रमुख द्वार से अन्दर प्रवेश करते है तो आपको समुद्र से आने वाली किसी भी तरह की कोई आवाज सुनाई नहीं देती परन्तु जैसे ही आप मंदिर के बाहर कदम रखेंगे आपको समुद्र की आवाज साफ़ सुनाई देगी। श्याम के समय इसे अच्छी तरह से अनुभव किया जा सकता है। इसी मंदिर के पास स्वर्ग द्वार है जहाँ मोक्ष प्राप्ति के लिए शव जलाये जाते है मगर आप जब मंदिर से बाहर निकलेंगे तभी आपको लाशों की गंध महसूस होगी। 

भगवान् जगन्नाथ की बदलती मूर्ति 

जगन्नाथ पूरी में भगवान् श्रीकृष्ण को जगन्नाथ कहा जाता है भगवान् जगन्नाथ के साथ भाई बलराम और बहन सुभद्रा विराजमान है। तीनो की यह मूर्तियाँ लकड़ी की बानी हुई है यहाँ हर बारह साल में प्रतिमा नए सिरे से तैयार होती है। मुतियाँ नयी जरूर बनायीं जाती है मगर आकर और रूप वही रहता है। जिस प्रकार से आत्मा शरीर बदलती है उसी प्रकार हर बारह साल में इस मंदिर की प्रतिमा को पुनः बनाया जाता है उसको नव-कलेवर कहा जाता है यानी कलेवर परिवर्तन। इतना ही नहीं हर बारह साल बाद एक निश्चित तिथि को भगवान् जगन्नाथ की मूर्तियाँ गर्भ गृह से अपने आप गायब हो जाती है। 

भगवान् जगन्नाथ पूरी में निकलने वाली यात्रा

भगवान् जगन्नाथ पूरी में हर साल भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है यह यात्रा पांच किलोमीटर के इलाके में निकाली जाती है। जिसके लिए हर साल नया रथ बनाया जाता है। इस यात्रा में लाखों लोग शामिल होते है। इस यात्रा में पैर रखने की भी जगह नहीं होती है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी रथयात्रा माना जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि साल में एक बार सभी लोग प्रभु को जी भरकर दर्शन कर पाए और अपना दुःख-सुख प्रभु को सुना पाए। रथ यात्रा के दौरान हरी कीर्तन की ध्वनि इतनी तीव्र होती है की आप और कुछ भी सुन नहीं पाएंगे जिससे हर कोई उस कीर्तन में खो जाता है। और आपको जानकर हैरानी होगी की हर साल होने वाली इस यात्रा में सदा बारिश होती ही है। सदियों से भक्तो ने ऐसा कोई साल नहीं देखा जब आसमान सूखा रह गया हो।

भगवान् जगन्नाथ पूरी के रक्षक प्रभु श्रीहनुमान

माना जाता है की इतिहास में तीन बार समुद्र ने भगवान् जगन्नाथ के मंदिर को तोड़ दिया था। ऐसा कहते है है की भगवान् जगन्नाथ ने हनुमान जी को समुद्र को नियंत्रित करने के लिए यहाँ तैनात किया था। लेकिन हनुमानजी भी प्रभु के दर्शन के लिए नगर में प्रवेश कर जाते थे। ऐसे में समुद्र भी उनके पीछे पीछे नगर में दाखिल हो जाता था। तब भगवान् जगन्नाथ ने हनुमानजी को स्वर्ण पेढ़ी में तट पर स्थापित किया था। जहाँ आज भी बजरंगबली का प्राचीन मंदिर है।

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