जानिए क्यों आती है कैलाश पर्वत से ॐ की आवाज ? Kailash Parvat | Kailash Mansarovar ke rehsya

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दोस्तों, आप सभी का टीम स्पिरिचुअल गॉसिप्स की ओर से हार्दिक अभिनन्दन, दोस्तों  आज हम आप सब के सामने भगवान् शिव का निवास स्थान के रूप में विख्यात कैलाश पर्वत और उससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य तथा जानकारी लेकर आये है । दोस्तों वैसे तो पृथ्वी पर कम-से-कम 109 पर्वत हैं जिनकि ऊँचाई समुद्रतल से 7,200 मीटर (23,622 फ़ुट) से अधिक है। इनमें से अधिकांश मध्य एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत की सीमा पर स्थित हैं ।

भगवान शंकर का निवास स्थान कैलाश पर्वत है और उसके पास स्थित है मानसरोवर झील। यह अद्भुत स्थान रहस्यों से भरा है। शिवपुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में कैलाश खंड नाम से अलग ही अध्याय है, इस तीर्थ को अस्टापद, गणपर्वत और रजतगिरि भी कहते हैं। कैलाश के बर्फ से आच्छादित 6,638 मीटर (21,778 फुट) ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर के इस तीर्थ को मानस खंड भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था । स्वामी मंगलेश्वर श्री ऋषभदेव भगवान के पुत्र भरत ने दिग्विजय के समय इस पर विजय प्राप्त की थी । पांडवों के दिग्विजय प्रयास के समय अर्जुन ने भी  इस प्रदेश पर विजय प्राप्त कि थी। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में इस प्रदेश के राजा ने उत्तम घोड़े, सोना, रत्न और याक के पूछ के बने काले और सफेद चामर भेंट किए थे। इनके अतिरिक्त अन्य अनेक ऋषि मुनियों के यहाँ निवास करने का उल्लेख प्राप्त होता है।

जैन धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व है। इसी पर्वत पर श्री भरत स्वामी ने रत्नों के 72 जिनालय बनवाये थे


कैलाश की परिक्रमा तारचेन से आरंभ होकर वहीं समाप्त होती है। इसके मध्य में पहले बाई ओर मानसरोवर और दाई ओर राक्षस ताल है। उत्तर की ओर दूर तक कैलाश पर्वत के हिमाच्छादित धवल शिखर का रमणीय दृश्य दिखाई पड़ता है। दर्रा समाप्त होने पर तीर्थपुरी नामक स्थान है जहाँ गर्म पानी के झरने हैं। इन झरनों के आसपास चूनखड़ी के टीले हैं। प्रवाद है कि यहीं भस्मासुर ने तप किया और यहीं वह भस्म भी हुआ था। इसके आगे डोलमाला और देवीखिंड ऊँचे स्थान है, उनकी ऊँचाई 5,630 मीटर (18,471 फुट) है। इसके निकट ही गौरीकुंड है। मार्ग में स्थान स्थान पर तिब्बती लामाओं के मठ हैं। कैलाश पर्वत चोटी की आकृति विराट शिवलिंग की तरह है, जिस पर साल भर बर्फ की सफेद चादर लिपटी रहती है। कैलाश पर्वत पर चढना निषिद्ध माना जाता है परन्तु 11 सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर चढाई की थी।

कैलाश पर्वतमाला कश्मीर से लेकर भूटान तक फैली हुई है और ल्हा चू और झोंग चू के बीच कैलाश पर्वत है जिसके उत्तरी शिखर का नाम कैलाश है। इस शिखर की आकृति विराट् शिवलिंग की तरह है। पर्वतों से बने षोडशदल कमल के मध्य यह स्थित है। यह सदैव बर्फ से आच्छादित रहता है। इसकी परिक्रमा का महत्व कहा गया है। तिब्बती (लामा) लोग कैलाश मानसरोवर की तीन अथवा तेरह परिक्रमा का महत्व मानते हैं और अनेक यात्री मानते है की  दंडवत  प्रणिपात करने से एक जन्म का, दस परिक्रमा करने से एक कल्प का पाप नष्ट हो जाता है। जो 108 परिक्रमा पूरी करते हैं उन्हें जन्म-मरण से मुक्ति मिल जाती है।

भगवान शिव को दुनिया के सभी धर्मों का मूल माना जाता है और हिन्दू धर्म में भगवान शिव को मृत्युलोक का देवता माना गया है। भगवान शिव अजन्मे माने जाते हैं, ऐसा कहा जाता है कि उनका न तो कोई आरम्भ हुआ है और न ही अंत होगा। इसीलिए वे अवतार न होकर साक्षात ईश्वर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कैलाश पर्वत को भगवान शंकर का निवास स्थान माना जाता है। लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते हैं. इसके अलावा कैलाश पर्वत की चोटियों के बीच स्थित झील को “मानसरोवर झील” के नाम से जाना जाता है। कैलाश पर्वत को दुनिया के सबसे रहस्यमयी पर्वतों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी के पास कुबेर की नगरी है। यहीं से महाविष्णु के कर-कमलों से निकलकर गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां प्रभु शिव उन्हें अपनी जटाओं में भर धरती में निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं। कैलाश पर्वत के ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है। इस लेख में हम कैलाश पर्वत से जुड़े 12 रोचक तथ्यों का विवरण दे रहे है।

धरती का केंद्र

धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का केंद्र है।

अलौकिक शक्ति का केंद्र

यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।

पिरामिडनुमा क्यों है यह पर्वत

कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड है, जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है। कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 दिक् बिंदुओं के समान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है।

दो रहस्यमयी सरोवरों का रहस्य

यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?

चार महान नदियों का उद्गम स्थल

कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं। कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है। पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।

मानसरोवर झील में नहाने से मिलती है पापों से मुक्ति

यदि आप कैलाश पर्वत की यात्रा करते हैं तो मानसरोवर झील में स्नान करने का सबसे उपयुक्त समय प्रातः 3 बजे से 5 बजे का है, जिसे ब्रह्ममुहूर्त के नाम से जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस समय देवता भी स्नान करने के लिए इस झील पर आते है। हिन्दू पौराणिक कथाओं में इस बात का भी उल्लेख किया गया है, कि मानसरोवर झील में पवित्र डुबकी लगाने से पिछले 7 जन्मों के सभी पाप मिट जाते है।

येति मानव का रहस्य

हिमालयवासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं।

मानसरोवर झील के पिघलने पर मृदंग की आवाज आती है

गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर झील की बर्फ़ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज़ भी सुनाई देती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मृदंग की आवाज़ है। मान्यता यह भी है कि मानसरोवर झील में एक बार डुबकी लगाने वाला व्यक्ति और यमद्वार की 11 परिक्रमा लगाने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद “रुद्रलोक” पहुंच जाता है। इसके अलावा कैलाश पर्वत के ठीक नीचे मृत्यलोक स्थित है, जिसकी बाहरी परिधि 52 किमी है।

यहॉं समय बेहद तेजी से बीतता है

आप मानें या न मानें, लेकिन कैलाश पर्वत पर समय तेजी से बीतता है। वहाँ जाने वाले यात्रियों और वैज्ञानिकों ने अपने बाल और नाखूनों को तेजी से बढ़ते हुए देखा है, जिसके आधार पर उनका अनुमान है कि कैलाश पर्वत पर समय तेजी से बीतता है। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक इसके पीछे के कारणों को ढूँढने में सफल नहीं हो पाये है।

कैलाश पर्वत अपनी स्थिति बदलता रहता है

बहुत से लोगों ने कैलाश पर्वत की चोटी पर पहुंचने की कोशिश की है, लेकिन कभी-कभी अत्यधिक खराब जलवायु परिस्थितियों के कारण और कभी-कभी पहाड़ द्वारा अपने लक्ष्य स्थान को बदलने के कारण कोई भी अपने प्रयास में सफल नहीं हुआ है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा ! लोगों को ऐसा महसूस होता है कि कैलाश पर्वत की चोटी पर चढ़ने के दौरान वे अपने रास्ते से भटक जाते थे।

कैलाश पर्वत पर सूर्योदय के दौरान रहस्यमय स्वास्तिक का दिखना

कैलाश पर्वत के ठण्डे पहाड़ों पर जब सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें पड़ती है तो विशाल स्वास्तिक की आकृति बनती है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि भगवान सूर्य भगवान शिव को प्रणाम कर रहे है।

कैलाश पर्वत से डमरू और ओम की आवाज प्रतिध्वनित होती है

कैलाश पर्वत को ॐ पर्वत के रूप में भी जाना जाता है। तीर्थयात्रियों का कहना है कि कैलाश पर्वत पर पहुंचने पर ॐ की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इसके अलावा तीर्थयात्रियों का यह भी कहना है कि भगवान शिव के निवासस्थान के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान पर एक अद्भुत शान्ति की अनुभूति होती है। यदि आप कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के क्षेत्र में जाएंगे, तो आपको निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज 'डमरू' या 'ॐ' की ध्वनि जैसी लगती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि हो सकता है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से 'ॐ' की आवाजें सुनाई देती हैं।

आसमान में लाइट का चमकना

दावा किया जाता है कि कई बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गई हैं। नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि हो सकता है कि ऐसा यहां के चुम्बकीय बल के कारण होता हो। यहाँ का चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण कर सकता है।

कैलाश पर्वत पर चारों ओर एक अलौकिक शक्ति

कैलाश पर्वत और उसके आस-पास के वातावरण पर अध्धयन कर रहे वैज्ञानिक "ज़ार निकोलाइ रोमनोव" और उनकी टीम ने तिब्बत के मंदिरों में धर्मं गुरूओं से मुलाकात की थी। उन धर्म गुरूओं ने बताया कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है जिसमें तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरूओं के साथ टेलिपेथी संपर्क करते है।  

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